वादा किया गया था ‘भरोसा इन, डर आउट‘ लेकिन असलियत में गरीबों को डरा कर रखा जा रहा है। बिना पुनर्वास के अमानवीय रूप से हॉकरों को हटाया जा रहा है। हॉकरों की आजीविका वापस लाने की लड़ाई में जहां तक संभव होगा श्रमिक आंदोलन लड़ेगा।

सोमवार को एंटाली से सियालदह तक सीआईटीयू, एआईयूटीयूसी, यूटीयूसी सहित विभिन्न केंद्रीय वामपंथी और आईएनटीयूसी जैसे श्रमिक संगठनों की संयुक्त रैली में यह घोषणा की गई। इस दौरान उजाड़े गए हॉकरों ने रैली से सरकार के इस अमानवीय रवैये की कड़ी निंदा की।

विधानसभा चुनाव में भाजपा के राज्य की सत्ता में आने के बाद, सबसे पहले विजय जुलूस के नाम पर न्यू मार्केट में हॉकरों पर हमला किया गया था। उसके बाद से ही राज्य के विभिन्न स्टेशनों पर रेलवे हॉकरों को हटाया जा रहा है। इसके खिलाफ राज्य में हर जगह सीआईटीयू ने विरोध प्रदर्शन खड़ा किया है।

इस रैली में सीआईटीयू के राज्य अध्यक्ष अनादि साहू, पश्चिम बंगाल रेलवे हॉकर्स यूनियन के अध्यक्ष अलकेश दास, सचिव दीपांकर शील, सीआईटीयू नेता गार्गी चटर्जी और मीनाक्षी मुखर्जी सहित वामपंथी संगठनों के नेता शामिल थे।

 सी आई टी यू नेता अनादि साहू ने कहा कि भाजपा के इस राज्य में सत्ता में आते ही हमने देखा कि कोलकाता सहित राज्य के विभिन्न हिस्सों में बुलडोजर लेकर हॉकरों पर कितना भयानक हमला किया जा रहा है। हॉकर गरीब लोग हैं। रात के अंधेरे में सियालदह सहित विभिन्न स्टेशनों पर उनके सामान को तोड़-फोड़ कर नष्ट कर दिया गया। साथ ही यह कहा गया कि सियालदह स्टेशन परिसर को हॉकर-मुक्त कर दिया गया है। लेकिन वहीं पर बड़े-बड़े कॉर्पोरेट्स के शॉपिंग मॉल पिछले कई दशकों से बने हुए हैं। उन्होंने आगे कहा, हमारे देश में हॉकर कानून है। उसमें कहा गया है कि बिना पुनर्वास के हॉकरों को नहीं हटाया जा सकता। रेलवे में जो लोग स्टाल लगाते हैं, उनके लिए रोजगार का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। लाखों नौकरियों का वादा करने के बाद भी सरकार ने इसकी कोई व्यवस्था नहीं की। बिना कोई जिम्मेदारी निभाए केंद्र और राज्य सरकार गरीब लोगों पर हमला कर रही है।"

पश्चिम बंगाल रेलवे हॉकर्स यूनियन के सचिव दीपांकर शील ने कहा कि 4 तारीख को भाजपा सरकार के सत्ता में आने के तुरंत बाद ही उन्होंने इस बात का खाका (ब्लूप्रिंट) तैयार कर लिया कि गरीब लोगों पर कैसे हमला किया जाए। कहने को उन्होंने कहा था 'डर आउट, भरोसा इन'। हकीकत में, भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से ही राज्य के गरीब लोग डर और दहशत में जी रहे हैं। जिन लोगों को बेदखल कर दिया गया, वे नहीं जानते कि अब वे क्या करेंगे।" उन्होंने कहा, "देश के कानून के अनुसार हॉकरों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। हमने हॉकर यूनियन की ओर से इस व्यवस्था की मांग की है। बिना पुनर्वास के एक भी हॉकर को नहीं हटाया जा सकता।"

 सी आई टी यू नेत्री गार्गी चटर्जी ने कहा कि रात के अंधेरे में चोरों की तरह हॉकरों पर अत्याचार किया जा रहा है। अगर दिन का उजाला होता, तो वे सियालदह, हावड़ा तो क्या, किसी भी स्टेशन पर यह काम नहीं कर पाते। रात के अंधेरे में, चुनाव कराने आए सेंट्रल फोर्स (केंद्रीय बलों) का इस्तेमाल करके चोरों और कायरों की तरह मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के पेट पर लात मारी जा रही है। उनके छोटे व्यवसाय को नष्ट किया जा रहा है। इस अमानवीयता के लिए कोई माफी नहीं है। इस सिलसिले में हम डीआरएम के पास गए हैं। हम फिर जाएंगे, रेलवे बोर्ड को सूचित करेंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। हम इन हॉकरों की आजीविका वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

 मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि रात के अंधेरे में हॉकरों पर हमला करने का मतलब है कि सरकार हॉकरों की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहती। जबकि उन्हीं के वोटों से आज सरकार बनी है। उन्होंने कहा, "जिन्हें हटाया जा रहा है, वे उस जमीन पर बैठकर ईमानदारी से कुछ कमा रहे थे। सरकार हॉकरों के लिए ईमानदारी से कमाने की कोई दूसरी व्यवस्था करे।" मीनाक्षी ने आगे कहा, "रेलवे की जमीन पर बड़े-बड़े कॉर्पोरेट्स की दुकानें तो बनी हुई हैं। अमीर हॉकर चलेंगे, लेकिन सरकार बीस रुपये के मूंगफली वाले को जगह नहीं दे पा रही है।"

साभार: गणशक्ति