वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
ब्रेकिंग
और खबरें ›
वाम की आवाज़ लोगोवाम की आवाज़अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,
ब्रेकिंग
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत॥भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न॥शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक॥चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु॥सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।॥देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम॥लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान॥'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'॥हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत॥भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न॥शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक॥चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु॥सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।॥देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम॥लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान॥'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'॥
✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊   ✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊  
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत
राष्ट्रीय

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।

अपराजिता · 14 घंटे पहले · 3 मिनट पाठ
पूरा पढ़ें →
11
भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न
राष्ट्रीय

भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न

"न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए - क्या हमारा लोकतंत्र इस कसौटी पर खरा उतर रहा है?" प्रस्तुत विश्लेषण भारतीय न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी शीर्ष संवैधानिक संस्थाओं में गहराते 'हितों के टकराव'और संस्थागत क्षरण पर चिंता व्यक्त करता है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा द्वारा चुनाव आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करना - जबकि उनके पुत्र आयोग के स्थायी वकील हैं - न्यायिक शुचिता और रोस्टर नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की आईएएस बेटी को हाईकोर्ट के दंडात्मक आदेश से सुप्रीम कोर्ट द्वारा त्वरित राहत मिलना और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका का अनिश्चितकाल के लिए टल जाना व्यवस्थागत पक्षपात की ओर इशारा करता है। यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कार्यपालिका (सरकार) के बढ़ते प्रभाव और प्रक्रियागत कमियों के कारण देश 'नियंत्रित लोकतंत्र' और संवैधानिक संतुलन के कमजोर होने की दिशा में बढ़ रहा है।

केशव कुमार भट्टड़ · 20 घंटे पहले · 12 मिनट पाठ
पूरा पढ़ें →
63
शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक
श्रद्धांजलि

शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

28 सितंबर 2026 - शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती है। उनका प्रसिद्ध नारा ‘इंकलाब जिंदाबाद’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आदमी होने की असली तमीज़ और चेतना का महाकाव्य है। यह वर्ष 'नौजवान भारत सभा' का शताब्दी वर्ष और 'शहीद यादगार समिति' का रजत जयंती वर्ष भी है। भगत सिंह की क्रांतिकारी आवाज़ केवल शोर नहीं थी, बल्कि उसके पीछे गहरा अध्ययन, सामाजिक न्याय और विश्व के महान विचारकों का वैचारिक आधार था। साम्राज्यवादी ब्रिटिश हुकूमत ने डरकर 23 मार्च 1931 को उन्हें फाँसी दे दी, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ बाज़ारवाद, शोषण और अन्याय के खिलाफ आम आदमी की चेतना और बदलाव के लिए संघर्ष का प्रतीक है। आज के अवसरवादी राजनीतिक दौर में भगत सिंह के विचार एक न्यायपूर्ण भविष्य गढ़ने की प्रेरणा देते हैं और मशाल बनकर राह दिखाते हैं।

केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 7 मिनट पाठ
पूरा पढ़ें →
120
चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु
राष्ट्रीय

चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु

वोटर लिस्ट में शुद्धि के नाम पर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर डाका- यह लोकतंत्र का सुधार नहीं, उसका संहार है! विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में अन्य आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी सॉफ्टवेयर, आईटी विभाग के केंद्रीकरण और 'फॉर्म 7' के थोक दुरुपयोग के जरिए करोड़ों पात्र व अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से बाहर करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। अपीलों की जांच में 91% मामलों में नाम बहाल होना आयोग की मनमानी और न्यायिक ट्रिब्यूनल व सुप्रीम कोर्ट की नाकामी को उजागर करता है। यदि निष्पक्षता और जिम्मेदार अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग नहीं उठाई गई, तो देश के चुनावी लोकतंत्र का भविष्य बेहद अंधकारमय है।

केशव कुमार भट्टड़ · 3 दिन पहले · 8 मिनट पाठ
पूरा पढ़ें →
55
सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन)  प्रकाशित की गयी ।
राज्य

सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

अपराजिता · 3 दिन पहले · 3 मिनट पाठ
पूरा पढ़ें →
7
ताज़ा खबरें
देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीमराज्यदेश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।" मोहम्मद सलीम सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिवअपराजिता · 5 दिन पहले · 10 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलानराष्ट्रीयलोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलानकेशव कुमार भट्टड़ · 6 दिन पहले · 67 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'विश्लेषण'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'केशव कुमार भट्टड़ · 6 दिन पहले · 82 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →वाममोर्चा की पुकार पर 29 सितम्बर को  कोलकाता नगर निगम अभियानराज्यवाममोर्चा की पुकार पर 29 सितम्बर को कोलकाता नगर निगम अभियानअपराजिता · 6 दिन पहले · 6 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →ECI: चुनाव आयोग पर तानाशाही कब्ज़ा: 'तीन में से दो' आयुक्तों की अभूतपूर्व बगावतराष्ट्रीयECI: चुनाव आयोग पर तानाशाही कब्ज़ा: 'तीन में से दो' आयुक्तों की अभूतपूर्व बगावतकेशव कुमार भट्टड़ · 23 सितंबर 2026 · 158 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →
3 मिनटसमझें सिर्फ 3 मिनट में
01हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीतपढ़ना शुरू करें →02सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।पढ़ना शुरू करें →03केरल कॉलेज यूनियन-चुनावों में SFI की ऐतिहासिक और प्रचंड जीतपढ़ना शुरू करें →04केरल स्कूल संसद चुनाव: ~ 699 में से 604 स्कूलों में 'एस एफ आई' की महाविजय ~पढ़ना शुरू करें →05सहारनपुर मस्जिद गिराने के खिलाफ वामपंथी दलों ने पूरे उत्तर प्रदेश में उठाई जोरदार आवाज!पढ़ना शुरू करें →06प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथपढ़ना शुरू करें →07माफीनामा: हूबनाथपढ़ना शुरू करें →
ग्राउंड रिपोर्ट
देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीमराज्यदेश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।" मोहम्मद सलीम सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिवअपराजिता · 5 दिन पहले · 10 क्लिकलोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलानराष्ट्रीयलोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलानसीपीआई(एम) के महासचिव एम. ए. बेबी , भाकपा के महासचिव डी. राजा और भाकपा-माले लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आज संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सप्ताह भर के देशव्यापी विरोध का ऐलान किया है। इसमें 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के नाम पर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार छीनने का आरोप लगाया गया है। वाम दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे/महाभियोग और SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक की मांग की है। इस आंदोलन में शहीद भगत सिंह जयंती (28 सितंबर) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर विशाल जन-विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। वामपंथी नेताओं ने सभी धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों, सिविल सोसाइटी और जन-बुद्धिजीवियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।केशव कुमार भट्टड़ · 6 दिन पहले · 67 क्लिक'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'विश्लेषण'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'क्या चुनाव आयोग को अदृश्य शक्तिशाली हाथ नियंत्रित कर रहे हैं ? नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल और भीतर से उठता असंतोष - केन्द्रीय चुनाव आयोग पर यह दोहरा खुलासा - साबित करता है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था अब संविधान, नैतिकता और परंपरा की कसौटी पर पूरी तरह संदिग्ध बन चुकी है। 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने विभाजित फैसला सुनाया है, जिसके बाद मामला प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को भेज दिया गया है। पीठ के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश को हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित होती है । अंतिम निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट में जारी देरी को जजों ने खुद "संस्थागत शर्मिंदगी" करार दिया है । दूसरी ओर, 'द इंडियन एक्सप्रेस' के खुलासे के अनुसार, आयोग के दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी - ने पिछले 10 महीनों में 14 बार प्रक्रियागत उल्लंघनों, अवैध फॉर्म बदलावों और आईटी शक्तियों के केंद्रीयकरण पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों पर आयोग ने ठोस जवाब देने के बजाय इन्हें केवल 'आंतरिक सुझाव' बताकर 'टालने' की कोशिश की है।केशव कुमार भट्टड़ · 6 दिन पहले · 82 क्लिक
LIVEसक्रिय संघर्ष ट्रैकर
किसान आंदोलन
दिल्ली सीमा · नवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
सक्रिय
आशा कर्मी हड़ताल
महाराष्ट्र · जनवरी 2026 से
वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
हड़ताल
मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंड · मार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
सक्रिय
शिक्षक भर्ती संघर्ष
उत्तर प्रदेश · दिसंबर 2025 से
लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
आंशिक जीत
प्रमुख विचार

कोई प्रमुख विचार चयनित नहीं है।

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं
01'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़356 क्लिक02‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम354 क्लिक03'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'334 क्लिक04दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार330 क्लिक05'बदलाव का कोई शॉर्टकर्ट नहीं होता - गणेश शंकर विद्यार्थी।' अनीश अंकुर की कलम से324 क्लिक06नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़323 क्लिक07राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी300 क्लिक08प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?291 क्लिक09नीट महाघोटाला: क्या 'सस्ते' चरित्र और 'महंगे' पँचों की बलि चढ़ेगा देश का भविष्य? - केशव भट्टड़288 क्लिक10युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल279 क्लिक
संसाधन
न्यूज़लेटर

रोज़ शाम 7 बजे दिनभर की प्रमुख खबरें और विश्लेषण सीधे आपके ईमेल पर।

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

वाम की आवाज़ लोगोवाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे मेंसंपादकीय नीतिसुधार नीतिगोपनीयता नीतिसंपर्क करें
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेख
बुधवार, 30 सितंबर 2026 | Wednesday, 30 September 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.com
सदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
ब्रेकिंग
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत॥भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न॥शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक॥चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु॥सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।॥देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम॥लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान॥'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'॥हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत॥भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न॥शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक॥चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु॥सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।॥देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम॥लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान॥'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'॥
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत
इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊   इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊  
राष्ट्रीय

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।

अपराजिता·14 घंटे पहले·3 मिनट पाठ·11 पाठक
पूरा पढ़ें →
और खबरें ›
राष्ट्रीय

भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न

20 घंटे पहले · 12 मिनट पाठ
श्रद्धांजलि

शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

2 दिन पहले · 7 मिनट पाठ
राष्ट्रीय

चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु

3 दिन पहले · 8 मिनट पाठ
आज की प्राथमिकताएँ
सभी देखें →
भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न
राष्ट्रीय

भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न

"न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए - क्या हमारा लोकतंत्र इस कसौटी पर खरा उतर रहा है?" प्रस्तुत विश्लेषण भारतीय न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी शीर्ष संवैधानिक संस्थाओं में गहराते 'हितों के टकराव'और संस्थागत क्षरण पर चिंता व्यक्त करता है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा द्वारा चुनाव आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करना - जबकि उनके पुत्र आयोग के स्थायी वकील हैं - न्यायिक शुचिता और रोस्टर नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की आईएएस बेटी को हाईकोर्ट के दंडात्मक आदेश से सुप्रीम कोर्ट द्वारा त्वरित राहत मिलना और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका का अनिश्चितकाल के लिए टल जाना व्यवस्थागत पक्षपात की ओर इशारा करता है। यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कार्यपालिका (सरकार) के बढ़ते प्रभाव और प्रक्रियागत कमियों के कारण देश 'नियंत्रित लोकतंत्र' और संवैधानिक संतुलन के कमजोर होने की दिशा में बढ़ रहा है।

केशव कुमार भट्टड़ · 12 मिनट · 63 पाठक · 20 घंटे पहले
🔊
शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक
श्रद्धांजलि

शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

28 सितंबर 2026 - शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती है। उनका प्रसिद्ध नारा ‘इंकलाब जिंदाबाद’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आदमी होने की असली तमीज़ और चेतना का महाकाव्य है। यह वर्ष 'नौजवान भारत सभा' का शताब्दी वर्ष और 'शहीद यादगार समिति' का रजत जयंती वर्ष भी है। भगत सिंह की क्रांतिकारी आवाज़ केवल शोर नहीं थी, बल्कि उसके पीछे गहरा अध्ययन, सामाजिक न्याय और विश्व के महान विचारकों का वैचारिक आधार था। साम्राज्यवादी ब्रिटिश हुकूमत ने डरकर 23 मार्च 1931 को उन्हें फाँसी दे दी, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ बाज़ारवाद, शोषण और अन्याय के खिलाफ आम आदमी की चेतना और बदलाव के लिए संघर्ष का प्रतीक है। आज के अवसरवादी राजनीतिक दौर में भगत सिंह के विचार एक न्यायपूर्ण भविष्य गढ़ने की प्रेरणा देते हैं और मशाल बनकर राह दिखाते हैं।

केशव कुमार भट्टड़ · 7 मिनट · 120 पाठक · 2 दिन पहले
🔊
चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु
राष्ट्रीय

चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु

वोटर लिस्ट में शुद्धि के नाम पर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर डाका- यह लोकतंत्र का सुधार नहीं, उसका संहार है! विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में अन्य आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी सॉफ्टवेयर, आईटी विभाग के केंद्रीकरण और 'फॉर्म 7' के थोक दुरुपयोग के जरिए करोड़ों पात्र व अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से बाहर करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। अपीलों की जांच में 91% मामलों में नाम बहाल होना आयोग की मनमानी और न्यायिक ट्रिब्यूनल व सुप्रीम कोर्ट की नाकामी को उजागर करता है। यदि निष्पक्षता और जिम्मेदार अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग नहीं उठाई गई, तो देश के चुनावी लोकतंत्र का भविष्य बेहद अंधकारमय है।

केशव कुमार भट्टड़ · 8 मिनट · 55 पाठक · 3 दिन पहले
🔊
सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन)  प्रकाशित की गयी ।
राज्य

सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

अपराजिता · 3 मिनट · 7 पाठक · 3 दिन पहले
🔊

ताज़ा खबरें

30 परिणाम
हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

राष्ट्रीय

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।

अपराजिता
• 14 घंटे पहले • 11 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न

राष्ट्रीय

भारतीय न्यायपालिका और चुनाव आयोग की साख पर उठे प्रश्न

"न्याय केवल होना नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखना भी चाहिए - क्या हमारा लोकतंत्र इस कसौटी पर खरा उतर रहा है?" प्रस्तुत विश्लेषण भारतीय न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी शीर्ष संवैधानिक संस्थाओं में गहराते 'हितों के टकराव'और संस्थागत क्षरण पर चिंता व्यक्त करता है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा द्वारा चुनाव आयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई करना - जबकि उनके पुत्र आयोग के स्थायी वकील हैं - न्यायिक शुचिता और रोस्टर नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इसी दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त की आईएएस बेटी को हाईकोर्ट के दंडात्मक आदेश से सुप्रीम कोर्ट द्वारा त्वरित राहत मिलना और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका का अनिश्चितकाल के लिए टल जाना व्यवस्थागत पक्षपात की ओर इशारा करता है। यह पूरा घटनाक्रम यह दर्शाता है कि कार्यपालिका (सरकार) के बढ़ते प्रभाव और प्रक्रियागत कमियों के कारण देश 'नियंत्रित लोकतंत्र' और संवैधानिक संतुलन के कमजोर होने की दिशा में बढ़ रहा है।

केशव कुमार भट्टड़
• 20 घंटे पहले • 63 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

श्रद्धांजलि

शहीद-ए-आज़म भगतसिंह: क्रांति, विचार और 'इंकलाब ज़िंदाबाद' के अमर नायक

28 सितंबर 2026 - शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती है। उनका प्रसिद्ध नारा ‘इंकलाब जिंदाबाद’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध आदमी होने की असली तमीज़ और चेतना का महाकाव्य है। यह वर्ष 'नौजवान भारत सभा' का शताब्दी वर्ष और 'शहीद यादगार समिति' का रजत जयंती वर्ष भी है। भगत सिंह की क्रांतिकारी आवाज़ केवल शोर नहीं थी, बल्कि उसके पीछे गहरा अध्ययन, सामाजिक न्याय और विश्व के महान विचारकों का वैचारिक आधार था। साम्राज्यवादी ब्रिटिश हुकूमत ने डरकर 23 मार्च 1931 को उन्हें फाँसी दे दी, लेकिन उनके विचार आज भी अमर हैं। ‘इंकलाब जिंदाबाद’ बाज़ारवाद, शोषण और अन्याय के खिलाफ आम आदमी की चेतना और बदलाव के लिए संघर्ष का प्रतीक है। आज के अवसरवादी राजनीतिक दौर में भगत सिंह के विचार एक न्यायपूर्ण भविष्य गढ़ने की प्रेरणा देते हैं और मशाल बनकर राह दिखाते हैं।

केशव कुमार भट्टड़
• 2 दिन पहले • 120 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु

राष्ट्रीय

चुनावी लोकतंत्र में धांधली का पर्दाफ़ाश ~ नीलोत्पल बसु

वोटर लिस्ट में शुद्धि के नाम पर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार पर डाका- यह लोकतंत्र का सुधार नहीं, उसका संहार है! विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में अन्य आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के एकतरफा फैसलों ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अमेरिकी सॉफ्टवेयर, आईटी विभाग के केंद्रीकरण और 'फॉर्म 7' के थोक दुरुपयोग के जरिए करोड़ों पात्र व अल्पसंख्यकों के नाम मतदाता सूची से बाहर करने की साजिश का पर्दाफाश हुआ है। अपीलों की जांच में 91% मामलों में नाम बहाल होना आयोग की मनमानी और न्यायिक ट्रिब्यूनल व सुप्रीम कोर्ट की नाकामी को उजागर करता है। यदि निष्पक्षता और जिम्मेदार अधिकारियों की बर्खास्तगी की मांग नहीं उठाई गई, तो देश के चुनावी लोकतंत्र का भविष्य बेहद अंधकारमय है।

केशव कुमार भट्टड़
• 3 दिन पहले • 55 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन)  प्रकाशित की गयी ।

राज्य

सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

अपराजिता
• 3 दिन पहले • 7 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

राज्य

देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

अपराजिता
• 5 दिन पहले • 10 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान

राष्ट्रीय

लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान

सीपीआई(एम) के महासचिव एम. ए. बेबी , भाकपा के महासचिव डी. राजा और भाकपा-माले लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने आज संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। वामपंथी दलों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक सप्ताह भर के देशव्यापी विरोध का ऐलान किया है। इसमें 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के नाम पर करोड़ों नागरिकों के मताधिकार छीनने का आरोप लगाया गया है। वाम दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे/महाभियोग और SIR प्रक्रिया पर तुरंत रोक की मांग की है। इस आंदोलन में शहीद भगत सिंह जयंती (28 सितंबर) और गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर विशाल जन-विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। वामपंथी नेताओं ने सभी धर्मनिरपेक्ष-लोकतांत्रिक राजनीतिक दलों, सिविल सोसाइटी और जन-बुद्धिजीवियों से इस अभियान में शामिल होने की अपील की है।

केशव कुमार भट्टड़
• 6 दिन पहले • 67 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'

विश्लेषण

'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'

क्या चुनाव आयोग को अदृश्य शक्तिशाली हाथ नियंत्रित कर रहे हैं ? नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल और भीतर से उठता असंतोष - केन्द्रीय चुनाव आयोग पर यह दोहरा खुलासा - साबित करता है कि देश की सबसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्था अब संविधान, नैतिकता और परंपरा की कसौटी पर पूरी तरह संदिग्ध बन चुकी है। 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने विभाजित फैसला सुनाया है, जिसके बाद मामला प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) को भेज दिया गया है। पीठ के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश को हटाकर केंद्रीय मंत्री को शामिल करने पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता प्रभावित होती है। अंतिम निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट में जारी देरी को जजों ने खुद "संस्थागत शर्मिंदगी" करार दिया है। दूसरी ओर, 'द इंडियन एक्सप्रेस' के खुलासे के अनुसार, आयोग के दो चुनाव आयुक्तों - सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी - ने पिछले 10 महीनों में 14 बार प्रक्रियागत उल्लंघनों, अवैध फॉर्म बदलावों और आईटी शक्तियों के केंद्रीयकरण पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इन आपत्तियों पर आयोग ने ठोस जवाब देने के बजाय इन्हें केवल 'आंतरिक सुझाव' बताकर 'टालने' की कोशिश की है।

केशव कुमार भट्टड़
• 6 दिन पहले • 82 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
वाममोर्चा की पुकार पर 29 सितम्बर को  कोलकाता नगर निगम अभियान

राज्य

वाममोर्चा की पुकार पर 29 सितम्बर को कोलकाता नगर निगम अभियान

बीजेपी सरकार ने राजनीतिक मंशा से जानबूझकर राजनीतिक योजना बनाकर कोलकाता नगर निगम का परिसीमन (डीलिमिटेशन) किया है। इस आरोप को उठाते हुए और नगर निगम के समग्र गतिरोध का विरोध जताते हुए आगामी 29 सितम्बर को कोलकाता जिला वाममोर्चा ने 'कोलकाता नगर निगम चलो' का आह्वान किया है।

अपराजिता
• 6 दिन पहले • 6 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
ECI: चुनाव आयोग पर तानाशाही कब्ज़ा: 'तीन में से दो' आयुक्तों की अभूतपूर्व बगावत

राष्ट्रीय

ECI: चुनाव आयोग पर तानाशाही कब्ज़ा: 'तीन में से दो' आयुक्तों की अभूतपूर्व बगावत

10 महीनों में 14 बार लिखित विरोध दर्ज। "वोटर लिस्ट में हेरफेर और संवैधानिक संस्थाओं को गुलाम बनाने की हर साजिश के खिलाफ जनता की आवाज बुलंद रहेगी - लोकतंत्र तानाशाही से नहीं हारेगा!" मोदी सरकार द्वारा चुनाव आयोग पर अपने एकाधिकार की कोशिशों का भंडाफोड़ हो गया है। आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त के 'मनमाने' और गैर-कानूनी फैसलों के खिलाफ दो चुनाव आयुक्तों ने सीधी बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। 10 महीनों में 14 बार लिखित विरोध दर्ज कराकर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि किस तरह डिजिटल केंद्रीकरण और 'फॉर्म-6' में असंवैधानिक बदलाव के जरिए करोड़ों नागरिकों और युवाओं को मताधिकार से बेदखल करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। अधिकारियों के अधिकारों पर डाका डालने से लेकर अदालतों में फर्जी याचिकाएं लगाने तक, लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण संस्था को तानाशाही के औजार में तब्दील किया जा चुका है। इतिहास में यह पहली बार है जब आयोग के बहुमत (तीन में से दो आयुक्तों) ने मतदाता सूची की शुचिता और संस्थागत पारदर्शिता को लेकर खुद आयोग के कामकाज पर सवाल खड़े किए हैं। 'यह लोकतंत्र के भरोसे पर प्रश्न चिन्ह है'।

केशव कुमार भट्टड़
• 23 सितंबर 2026 • 158 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
डीयू चुनाव ~ कैम्पस में 'दक्षिणपंथ' के खिलाफ गहरा असंतोष

विश्लेषण

डीयू चुनाव ~ कैम्पस में 'दक्षिणपंथ' के खिलाफ गहरा असंतोष

वोट बंटे तो फायदा एबीवीपी को पर 'वाम एकता' ने भी दिखाई कैम्पस में अपने दम पर खड़े रहने की ताकत! दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के नतीजों में वामपंथी छात्र गठबंधन एसएफआई (SFI) और आइसा (AISA) ने कई प्रमुख कॉलेजों और हंसराज जैसे पारंपरिक गढ़ों में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड वोट हासिल किए। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर पूर्व एनएसयूआई नेता दीपांशु शौकीन ने स्वतंत्र प्रत्याशी के रूप में सबसे बड़ी जीत दर्ज की। हालांकि विरोधी वोटों में हुए बिखराव का सीधा फायदा उठाकर एबीवीपी मुख्य चार केंद्रीय पदों में से तीन पर अपनी सीट बचाने में कामयाब रही। कुल मिलाकर, आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि विपक्षी वोटों का एकजुट न होना ही एबीवीपी की जीत की मुख्य वजह बना।

केशव कुमार भट्टड़
• 21 सितंबर 2026 • 117 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
हमले और धमकियों के आगे नहीं झुकेगा यौवन: इंकलाब समावेश में घोषणा

राज्य

हमले और धमकियों के आगे नहीं झुकेगा यौवन: इंकलाब समावेश में घोषणा

शुभेंदु अधिकारी दरअसल ममता बनर्जी के ही पदचिन्हों पर चल रहे हैं। हाल ही में सीपीआई(एम) कार्यालय पर बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हमले पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने राज्य में गृह युद्ध जैसे हालात बनाने के बजाय कानून का शासन बहाल करने की मांग की और चेतावनी दी कि अगर शुभेंदु अधिकारी सत्ता के नशे में ममता बनर्जी के रास्ते पर चलेंगे, तो उनका अंजाम भी ममता बनर्जी जैसा ही होगा।

अपराजिता
• 21 सितंबर 2026 • 9 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
केरल कॉलेज यूनियन-चुनावों में SFI की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत

राष्ट्रीय

केरल कॉलेज यूनियन-चुनावों में SFI की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत

छात्रों के जनादेश का स्पष्ट संदेश: परिसरों में भगवाकरण नामंजूर, SFI पर ही भरोसा भरपूर! स्कूल संसद में जबरदस्त जीत के बाद केरल के विश्वविद्यालय एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज संघ चुनावों में भी SFI ने बंपर जीत हासिल करते हुए अधिकांश कॉलेजों में अपना परचम लहराया है। संगठन ने केरल और कन्नूर विश्वविद्यालय सहित कई प्रमुख संस्थानों में विपक्षी छात्र संगठनों (KSU, UDSF, ABVP) से अनेक यूनियन सीटें वापस छीन लीं। यह ऐतिहासिक जीत ऐसे समय में दर्ज की गई है जब शिक्षा प्रणाली के कथित भगवाकरण के प्रयास किए जा रहे थे। राज्य में UDF शासन के बावजूद मिली इस शानदार सफलता ने मीडिया के उस आख्यान को खारिज कर दिया है कि SFI का वर्चस्व केवल LDF सत्ता के कारण था।

केशव कुमार भट्टड़
• 19 सितंबर 2026 • 112 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
यूपी: मनरेगा व रोजगार को लेकर खेत-ग्रामीण मजदूरों का प्रदेशभर में जोरदार प्रदर्शन

राष्ट्रीय

यूपी: मनरेगा व रोजगार को लेकर खेत-ग्रामीण मजदूरों का प्रदेशभर में जोरदार प्रदर्शन

अधिकारों की जंग, मजदूरों का यलगार - काम दो, दाम दो, सुनो जनता की पुकार! उत्तर प्रदेश खेत एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन ने 11 से 17 सितंबर तक प्रदेशभर के विकासखंड कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इस प्रदेशव्यापी अभियान के दौरान 12 सितंबर को कई जिलों में मजदूर वर्ग के महान नेता एवं सीपीआई(एम) के पूर्व महासचिव कामरेड सीताराम येचुरी को याद करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। यूनियन ने मनरेगा बहाली, 200 दिन रोजगार, 700 रुपये दिहाड़ी, बकाया भुगतान, मुफ्त बिजली-राशन और पेंशन बढ़ाने की मांग की। इसके अलावा भूमिहीनों को जमीन-आवास, बंद स्कूल खोलने, मुफ्त शिक्षा-स्वास्थ्य और जन-अधिकारों की रक्षा का मुद्दा उठाया। देवरिया, जौनपुर, मुरादाबाद, बलिया समेत कई जिलों में यह आंदोलन व्यापक रूप से चलाया गया। अभियान के दौरान मजदूरों के अधिकारों के संघर्ष को आगे भी निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया गया।

नवाब उद्दीन
• 19 सितंबर 2026 • 73 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
केरल स्कूल संसद चुनाव: ~ 699 में से 604 स्कूलों में 'एस एफ आई' की महाविजय ~

राष्ट्रीय

केरल स्कूल संसद चुनाव: ~ 699 में से 604 स्कूलों में 'एस एफ आई' की महाविजय ~

"समाजवाद ही भविष्य है, धर्मनिरपेक्षता ही ताकत है" - कलम, किताब और क्रांति का संगम; केरल के स्कूलों में लहराया लाल परचम! केरल के स्कूल संसद चुनावों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने 699 में से 604 स्कूलों में शानदार जीत दर्ज कर नया इतिहास रचा है, जिसमें 148 परिसरों में निर्विरोध निर्वाचन शामिल है। यह चुनाव दक्षिणपंथी राजनीति और छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ आम छात्रों का कड़ा प्रतिरोध बनकर उभरा। संगठन ने कासरगोड, कन्नूर, इडुक्की, मलप्पुरम और तिरुवनंतपुरम सहित लगभग सभी जिलों में विरोधियों को पछाड़कर अपना एकतरफा-दबदबा कायम किया। 'एस एफ आई' ने 'यू डी एस एफ' , 'एम एस एफ' और 'के एस यू' जैसे प्रतिद्वंद्वी छात्र गठबंधनों के कई मजबूत किलों और सीटों पर पुनः कब्ज़ा जमाया। एसएफआई राज्य सचिव मण्डल ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय संघर्षशील कार्यकर्ताओं और जागरूक छात्र समुदाय के अटूट विश्वास को दिया है।

केशव कुमार भट्टड़
• 19 सितंबर 2026 • 122 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
20 सितंबर इंकलाब समावेश- संघर्ष के रास्ते को और प्रशस्त करना होगा  :- अयनांशु सरकार

अतिथि लेखन

20 सितंबर इंकलाब समावेश- संघर्ष के रास्ते को और प्रशस्त करना होगा :- अयनांशु सरकार

ब्रिटिश साम्राज्यवाद-विरोधी लड़ाई में भगत सिंह के नेतृत्व वाली 'नौजवान भारत सभा' के क्रांतिकारियों और मास्टरदा सूर्य सेन के नेतृत्व वाली 'इंडियन रिपब्लिकन आर्मी' ने 'इंकलाब' का संदेश फैलाया था। हमारे देश में ब्रिटिश साम्राज्यवाद-विरोधी लड़ाई के साथ-साथ सभी के लिए शिक्षा और सभी के लिए काम की माँग भी बुलंद हुई थी। मार्च 1926 में भगत सिंह और भगवती चरण वोहरा के नेतृत्व में बनी 'नौजवान भारत सभा' के क्रांतिकारियों ने कहा था, "हम समाजवाद चाहते हैं। क्रांतिकारी चाहते थे कि एक ऐसा देश बने जहाँ शोषण न हो, सभी को शिक्षा का अवसर मिले, सभी के हाथों में काम हो, किसानों की फसलों को उचित मूल्य मिले, मजदूरों के काम के घंटे निश्चित हों और उन्हें सही मजदूरी मिले।"

अपराजिता
• 18 सितंबर 2026 • 31 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
पश्चिम बंगाल में चार हजार स्कूल बेचने की जोरदार तैयारी,नवान्न से स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश

राज्य

पश्चिम बंगाल में चार हजार स्कूल बेचने की जोरदार तैयारी,नवान्न से स्कूल शिक्षा विभाग को निर्देश

दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश की वर्तमान पीढ़ी के आंदोलन का एक मुख्य मुद्दा शिक्षा की बदहाल स्थिति भी था। जंतर-मंतर से ही देश के शैक्षणिक संस्थानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर के विद्यालयों का ऑडिट करने की घोषणा की। इस राज्य में भी स्कूली शिक्षा की बदहाली की असली तस्वीर सामने लाने के लिए एसएफआई (SFI) ने राज्यभर में 'स्कूल बचाओ, मूल बचाओ' आंदोलन शुरू किया है। इस बीच, राज्य सरकार इन चार हजार स्कूलों का बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी में है।

अपराजिता
• 18 सितंबर 2026 • 8 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर राम सिंह: क्रांति, त्याग और संघर्ष का प्रेरणादायी जीवन

श्रद्धांजलि

स्वतंत्रता सेनानी ठाकुर राम सिंह: क्रांति, त्याग और संघर्ष का प्रेरणादायी जीवन

"ठाकुर राम सिंह - काले पानी की यातनाओं से लेकर जन-संघर्ष तक, आजादी और अधिकारों के लिए समर्पित रहा जिनका जीवन " - अजमेर में जन्मे महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में 'डोगरा शूटिंग केस' के तहत काले पानी (अंडमान जेल) की कठोर सजा काटी। आजादी के बाद वे कम्युनिस्ट पार्टी और किसान सभा से जुड़कर आजीवन गरीबों व किसानों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे। उन्होंने आगरा को अपनी कर्मभूमि बनाया और संजय प्लेस में ऐतिहासिक 'शहीद स्मारक' व पुस्तकालय का निर्माण कराया। सादगी पसंद ठाकुर साहब 98 वर्ष की आयु तक क्रांतिकारी विचारों और सामाजिक न्याय के प्रतीक बने रहे। आगरा का शहीद स्मारक, पुस्तकालय-वाचनालय, उनके द्वारा प्रकाशित स्मारिकाएं और उनसे जुड़े लोगों की स्मृतियां आज भी उनके संघर्ष की कहानी कहती हैं। यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है। महान क्रांतिकारी ठाकुर राम सिंह को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि।

नवाब उद्दीन
• 16 सितंबर 2026 • 131 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
सहारनपुर मस्जिद गिराने के खिलाफ वामपंथी दलों ने पूरे उत्तर प्रदेश में उठाई जोरदार आवाज!

राष्ट्रीय

सहारनपुर मस्जिद गिराने के खिलाफ वामपंथी दलों ने पूरे उत्तर प्रदेश में उठाई जोरदार आवाज!

"क़ानून का राज ख़त्म,लोकतंत्र पर वार;सहारनपुर मस्जिद गिराए जाने पर वामपंथियों का तीखा प्रहार!"
1911 में निर्मित ऐतिहासिक मस्जिद को रातोंरात गिराए जाने के विरोध में चार वामपंथी दलों (माकपा, भाकपा, भाकपा-माले और फॉरवर्ड ब्लॉक) ने उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर वाम नेताओं ने इसे संवैधानिक अधिकारों का हनन और राज्य को ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ ("खौफनाक और दमनकारी शासन") बनाने की साज़िश करार दिया। प्रदर्शनकारियों ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों पर रोक लगाने, दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने और ध्वस्त मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग की है।

नवाब उद्दीन
• 16 सितंबर 2026 • 143 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

साहित्य-संस्कृति

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 16 सितंबर 2026 • 20 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
गड़वेता-शालबनी के 7 पार्टी दफ्तरों में बीजेपी का उपद्रव, लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई

राज्य

गड़वेता-शालबनी के 7 पार्टी दफ्तरों में बीजेपी का उपद्रव, लेनिन की मूर्ति तोड़ी गई

मंगलवार दोपहर गड़वेता के अमलागोड़ा तिराहे पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हथौड़े से लेनिन की मूर्ति तोड़ दी। उससे पहले शनिवार रात शालबनी में हमला हुआ था। शालबनी बाजार के पास सीपीआई(एम) का पुराना कार्यालय 'तुलसी भवन' है। सोमवार आधी रात को सबल और बड़े सीमेंट के खंभों से गेट तोड़कर बीजेपी कार्यकर्ता अंदर घुसे। उन्होंने टीवी, कंप्यूटर, रसोई गैस, पंखे समेत अन्य सामान लूट लिया। इसके बाद तोड़फोड़ करके आग लगा दी।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 16 सितंबर 2026 • 25 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
कॉमरेड डॉ. एस. पी. कश्यप - इतिहास, मार्क्सवाद और संघर्ष के महान शिक्षक।  ~ नवाब उद्दीन ~

श्रद्धांजलि

कॉमरेड डॉ. एस. पी. कश्यप - इतिहास, मार्क्सवाद और संघर्ष के महान शिक्षक। ~ नवाब उद्दीन ~

कॉमरेड डॉ. एस. पी. कश्यप - मार्क्सवादी दर्शन और जनसंघर्षों को जीवन का ध्येय बनाने वाले अनूठे शिक्षक - को नमन! वे एक मेधावी इतिहासकार, समर्पित कम्युनिस्ट और मार्क्सवादी विचारधारा के सहज शिक्षक थे। 19 वर्ष की उम्र से अध्यापन शुरू करने वाले कश्यप जी ने जीवन भर जनसंघर्षों और सांगठनिक दायित्वों को प्राथमिकता दी। प्राचार्य पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर उन्होंने खुद को पार्टी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में समर्पित कर दिया। उन्होंने सरल भाषा में जटिल मार्क्सवादी सिद्धांतों को कई पीढ़ियों के कार्यकर्ताओं तक पहुँचाया। आज साम्प्रदायिकता और सामाजिक चुनौतियों के दौर में उनकी वैचारिक विरासत अत्यधिक प्रासंगिक और प्रेरणादायी है।

केशव कुमार भट्टड़
• 15 सितंबर 2026 • 129 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
डीलिमिटेशन के नाम पर बीजेपी चला रही है 'जेरीमैंडरिंग' - मोहम्मद सलीम

राज्य

डीलिमिटेशन के नाम पर बीजेपी चला रही है 'जेरीमैंडरिंग' - मोहम्मद सलीम

भारत के संविधान में हर किसी को अपनी आस्था और विचारधारा के अनुसार जीने का अधिकार है। राज्य स्तर पर और एक ही राज्य के विभिन्न समुदायों के बीच कई तरह की परंपराएं, त्योहार, लोकचार और शास्त्रचार हैं, जिनका अपना ऐतिहासिक संदर्भ है। इसके साथ कुछ देशज परंपराएं भी हैं। जो लोग धर्म आधारित फासीवादी राजनीति करते हैं, वे अपनी सोच को दूसरों पर थोपना चाहते हैं, जो लोकतंत्र के पूरी तरह खिलाफ है। हमारे देश में कोई शाकाहारी है तो कोई मांसाहारी; हमारी एक मिश्रित संस्कृति है। इस विविधता को स्वीकार करना ही लोकतंत्र की नींव है, लेकिन बीजेपी इसे तोड़ना चाहती है। इसके खिलाफ हम उन सभी विचारशील लोगों को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं जो सवाल पूछने की हिम्मत रखते हैं और लोकतांत्रिक भावना से विरोध में खड़े होना चाहते हैं। यदि व्यापक वामपंथी एकता और उसके दायरे को नहीं बढ़ाया गया, तो हम पर चारों तरफ से हो रहे हमलों का मुकाबला नहीं किया जा सकेगा। गुंडों, पुलिस-प्रशासन और कानूनों के नए-नए रूपों के जरिए हमले हो रहे हैं—लेनिन, नेताजी, राहुल सांकृत्यायन, कोई भी इससे अछूता नहीं है।

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

अपराजिता
• 15 सितंबर 2026 • 8 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →
'ब्रिक्स' की सीमा ~ स्वतंत्र फ़िलिस्तीन को समर्थन ~ इज़राइल पर चुप्पी

अंतर्राष्ट्रीय

'ब्रिक्स' की सीमा ~ स्वतंत्र फ़िलिस्तीन को समर्थन ~ इज़राइल पर चुप्पी

फ़िलिस्तीन के हक़ में उठे बोल, मगर आक्रामक इज़राइल पर ब्रिक्स का रुख़ गोल!
ब्रिक्स के 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' में 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फ़िलिस्तीन राष्ट्र की स्थापना और गाजा में तुरंत युद्धविराम का समर्थन किया गया है। घोषणापत्र में मूल निवासियों के जबरन विस्थापन और गाजा के जनसांख्यिकीय स्वरूप को बदलने की कड़ी निंदा की गई है। हालांकि, गाजा में जारी हिंसा, वेस्ट बैंक पर अवैध कब्जे और मानवीय संकट के लिए जिम्मेदार इज़राइल का नाम लेने से सीधे तौर पर परहेज किया गया है। इस कारण फ़िलिस्तीन के अधिकारों की पैरोकारी के बावजूद, आक्रमणकारी की सीधी जवाबदेही तय करने के मामले में ब्रिक्स की सीमाएं उजागर होती हैं।

केशव कुमार भट्टड़
• 14 सितंबर 2026 • 115 क्लिक
पूरा लेख पढ़ें →

प्रमुख विचार

कोई प्रमुख विचार चयनित नहीं है।

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1
'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़356 क्लिक
2
‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम354 क्लिक
3
'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'334 क्लिक
4
दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार330 क्लिक
5
'बदलाव का कोई शॉर्टकर्ट नहीं होता - गणेश शंकर विद्यार्थी।' अनीश अंकुर की कलम से324 क्लिक
6
नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़323 क्लिक
7
राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी300 क्लिक
8
प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?291 क्लिक
9
नीट महाघोटाला: क्या 'सस्ते' चरित्र और 'महंगे' पँचों की बलि चढ़ेगा देश का भविष्य? - केशव भट्टड़288 क्लिक
10
युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल279 क्लिक

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

न्यूज़लेटर

रोज़ शाम 7 बजे दिनभर की प्रमुख खबरें और विश्लेषण सीधे आपके ईमेल पर।

अभियान कैलेंडर

कोई आगामी ईवेंट नहीं

ग्राउंड रिपोर्ट
देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम
राज्य

देश को अडानी-अंबानी का राष्ट्र बनाना चाहती है बीजेपी- मोहम्मद सलीम

"यह जो चुनाव हुआ, उसमें तरह-तरह की गड़बड़ियां करके और वोटर लिस्ट को ताक पर रखकर वोट कराए गए। एक शब्द में कहें तो कानून का पालन किए बिना काम हुआ है, नियम-कानून जैसा कुछ नहीं छोड़ा गया। हमने शुरुआत से ही संविधान और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात की है। असल बात यह है कि भ्रष्ट तृणमूल-कांग्रेस बीजेपी के साथ मिल गई है। शुभेंदु अधिकारी ने एक समय तृणमूल-कांग्रेस का झंडा लेकर करोड़ों रुपये खर्च किए और पुलिस व असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल करके पंचायत पर कब्जा किया था—यह बात लोग खुद कह रहे हैं। वही शुभेंदु अधिकारी अब बीजेपी में जाकर राज्य सरकार में आ गए हैं। चुनाव नतीजों के बाद कई लोगों ने सोचा था कि शायद अब भ्रष्टाचार बंद होगा। हमने तभी कहा था कि इन दोनों पार्टियों में कोई अंतर नहीं है। वही बात अब साबित हो चुकी है। तृणमूल-कांग्रेस खुलेआम बीजेपी में चली गई है। तो फिर क्या इस पार्टी से विकास की उम्मीद की जा सकती है? शुभेंदु अधिकारी और शमीक भट्टाचार्य हर दिन अपनी बात बदलते हैं। बीजेपी अपने फायदे के लिए आरएसएस के जरिए हुमायूं कबीर जैसे नेताओं को तैयार करती है। यही उनकी नीति है।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

अपराजिता · 5 दिन पहले
लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान
राष्ट्रीय

लोकतंत्र बचाओ: चुनाव आयोग के खिलाफ वाम दलों का देशव्यापी विरोध अभियान का ऐलान

केशव कुमार भट्टड़ · 6 दिन पहले
'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'
विश्लेषण

'नियुक्ति' से 'आंतरिक पतन' तक: 'कटघरे' में 'चुनाव आयोग'

केशव कुमार भट्टड़ · 6 दिन पहले
3 मिनटसमझें सिर्फ 3 मिनट में
01

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय : एबीवीपी को हराकर वामपंथी छात्र एकता की जीत

सत्तारूढ़ एबीवीपी (ABVP) को हराकर हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय (HCU) में एसएफआई (SFI) के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र एकता (Left Student Unity) ने बड़ी जीत हासिल की है।

पढ़ना शुरू करें →
02

सुजन चक्रवर्ती की पुस्तक'देशप्रेमेर खतियान, स्वाधीनता संग्राम ओ बांग्ला भाग' (देशप्रेम का ब्योरा, स्वतंत्रता संग्राम और बंगाल विभाजन) प्रकाशित की गयी ।

भाषा, जाति, धर्म और खान-पान के आधार पर लोगों के बीच विभाजन पैदा करने की राजनीति चल रही है।

पढ़ना शुरू करें →
03

केरल कॉलेज यूनियन-चुनावों में SFI की ऐतिहासिक और प्रचंड जीत

छात्रों के जनादेश का स्पष्ट संदेश: परिसरों में भगवाकरण नामंजूर, SFI पर ही भरोसा भरपूर! स्कूल संसद में जबरदस्त जीत के बाद केरल के विश्वविद्यालय एवं पॉलिटेक्निक कॉलेज संघ चुनावों में भी SFI ने बंपर जीत हासिल करते हुए अधिकांश कॉलेजों में अपना परचम लहराया है। संगठन ने केरल और कन्नूर विश्वविद्यालय सहित कई प्रमुख संस्थानों में विपक्षी छात्र संगठनों (KSU, UDSF, ABVP) से अनेक यूनियन सीटें वापस छीन लीं। यह ऐतिहासिक जीत ऐसे समय में दर्ज की गई है जब शिक्षा प्रणाली के कथित भगवाकरण के प्रयास किए जा रहे थे। राज्य में UDF शासन के बावजूद मिली इस शानदार सफलता ने मीडिया के उस आख्यान को खारिज कर दिया है कि SFI का वर्चस्व केवल LDF सत्ता के कारण था।

पढ़ना शुरू करें →
04

केरल स्कूल संसद चुनाव: ~ 699 में से 604 स्कूलों में 'एस एफ आई' की महाविजय ~

"समाजवाद ही भविष्य है, धर्मनिरपेक्षता ही ताकत है" - कलम, किताब और क्रांति का संगम; केरल के स्कूलों में लहराया लाल परचम! केरल के स्कूल संसद चुनावों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने 699 में से 604 स्कूलों में शानदार जीत दर्ज कर नया इतिहास रचा है, जिसमें 148 परिसरों में निर्विरोध निर्वाचन शामिल है। यह चुनाव दक्षिणपंथी राजनीति और छात्र-विरोधी नीतियों के खिलाफ आम छात्रों का कड़ा प्रतिरोध बनकर उभरा। संगठन ने कासरगोड, कन्नूर, इडुक्की, मलप्पुरम और तिरुवनंतपुरम सहित लगभग सभी जिलों में विरोधियों को पछाड़कर अपना एकतरफा-दबदबा कायम किया। 'एस एफ आई' ने 'यू डी एस एफ' , 'एम एस एफ' और 'के एस यू' जैसे प्रतिद्वंद्वी छात्र गठबंधनों के कई मजबूत किलों और सीटों पर पुनः कब्ज़ा जमाया। एसएफआई राज्य सचिव मण्डल ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय संघर्षशील कार्यकर्ताओं और जागरूक छात्र समुदाय के अटूट विश्वास को दिया है।

पढ़ना शुरू करें →
05

सहारनपुर मस्जिद गिराने के खिलाफ वामपंथी दलों ने पूरे उत्तर प्रदेश में उठाई जोरदार आवाज!

"क़ानून का राज ख़त्म,लोकतंत्र पर वार;सहारनपुर मस्जिद गिराए जाने पर वामपंथियों का तीखा प्रहार!"
1911 में निर्मित ऐतिहासिक मस्जिद को रातोंरात गिराए जाने के विरोध में चार वामपंथी दलों (माकपा, भाकपा, भाकपा-माले और फॉरवर्ड ब्लॉक) ने उत्तर प्रदेश के दो दर्जन से अधिक जिलों में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर वाम नेताओं ने इसे संवैधानिक अधिकारों का हनन और राज्य को ‘ऑर्वेलियन डिस्टोपिया’ ("खौफनाक और दमनकारी शासन") बनाने की साज़िश करार दिया। प्रदर्शनकारियों ने सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिशों पर रोक लगाने, दोषी अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई करने और ध्वस्त मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग की है।

पढ़ना शुरू करें →
06

प्रश्नोपनिषद - 2: हूबनाथ

प्रश्न करना /

राजद्रोह /

आंदोलन करना /

देशद्रोह /

हक़ मांगना /

राष्ट्रद्रोह /

बना दिया ।

इन सबके बावजूद /

लोग डर नहीं रहे /

छोटे-छोटे बच्चे /

खिलाफत को /

उतारू हैं ।

पढ़ना शुरू करें →
07

माफीनामा: हूबनाथ

हम तो /

नारी शक्ति के समक्ष /

नतमस्तक हैं ।

हम सभी /

एक स्त्री से ही तो /

जनमे हैं ।

उसी के संरक्षण में /

हमारा स्वर्णिम /

बालपन बीता है ।

पढ़ना शुरू करें →
LIVEसक्रिय संघर्ष ट्रैकर
किसान आंदोलन
दिल्ली सीमानवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
सक्रिय
आशा कर्मी हड़ताल
महाराष्ट्रजनवरी 2026 से
वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
हड़ताल
मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंडमार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
सक्रिय
शिक्षक भर्ती संघर्ष
उत्तर प्रदेशदिसंबर 2025 से
लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
आंशिक जीत

नई खबर जोड़ें

ब्लॉग पोस्ट जोड़ने के लिए एडमिन या एडमिन द्वारा अधिकृत योगदानकर्ता लॉगिन करें।

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement