स्वतंत्रता संग्राम से लेकर मेहनतकश लोगों के मुक्ति संग्राम तक, हम जिनकी विरासत को संभाल रहे हैं, उनके विचार, प्रज्ञा और यहाँ तक कि मूर्तियों पर भी हमले हो रहे हैं। चटगांव आंदोलन के नायक मास्टरदा सूर्य सेन ने प्राण दिए, लेकिन आरएसएस के सावरकर ने 'आजादी' शब्द दोबारा न बोलने का माफीनामा देकर जेल से रिहाई पाई थी।
लगातार आंदोलन के रास्ते से ही विभाजनकारी नीति का मुकाबला
दुर्गापुर में बोले मोहम्मद सलीम

पश्चिम बर्धमान जिला: लगातार आंदोलन और संघर्ष के रास्ते से ही नफरत व विभाजन की राजनीति को रोकना संभव है। मंगलवार को दुर्गापुर के सृजनी सभागार में सीपीआई (एम) कार्यकर्ताओं की एक सभा में पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने युवा पीढ़ी के आंदोलन के कारण मोदी सरकार के पीछे हटने का उदाहरण देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि आंदोलन ही रास्ता है और अधिक लोगों को शामिल करके हमें अपने आंदोलन व संघर्ष की ताकत एवं क्षमता बढ़ानी होगी।
मोहम्मद सलीम ने कहा कि आरएसएस-भाजपा धर्म, जाति और समुदाय के नाम पर लोगों को बाँटकर रखना चाहती है। लेकिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन की भूमि पर विभिन्न भाषाओं, विभिन्न विचारों और विविधताओं वाला भारत एकजुट हो गया था। युवा पीढ़ी के लोग, जिन्हें 'तिलचट्टा' और 'दीमक' कहकर अनदेखा व अपमानित किया गया था, उनके सामूहिक आंदोलन के आगे घमंडी भाजपा को सिर झुकाना पड़ा।

इस दिन सीपीआई (एम) की पश्चिम बर्धमान जिला कमेटी के आह्वान पर दुर्गापुर में 'चुनाव बाद की स्थिति और हमारी जिम्मेदारी' विषय पर आयोजित सभा में मुख्य वक्ता मोहम्मद सलीम थे। इसके अलावा पार्टी की केंद्रीय कमेटी के सदस्य आभास रायचौधरी और जिला सचिव गौरांग चटर्जी ने भी सभा को सम्बोधित किया। पार्थ मुखर्जी ने अध्यक्षता की।
सलीम ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्टों को कमजोर करने के लिए आरएसएस ने एक विशेष प्रोजेक्ट के तहत तृणमूल-कांग्रेस को बढ़ावा दिया, उसे तैयार किया और सत्ता में बैठाया। वामपंथियों के कारण ही इस राज्य में भाजपा को जगह नहीं मिल पा रही थी, अब भाजपा सत्ता में बैठी है जिसके पीछे धार्मिक फासीवादी आर एस एस है। गुलाम भारत में राष्ट्रीय आंदोलन की किसी भी धारा में आर एस एस की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा था कि अंग्रेजों ने हमें मुस्लिम शासकों से मुक्त कराया है। इस कारण आरएसएस किसी राष्ट्रवादी धारा को वहन नहीं करता, वे भारत छोड़ो आंदोलन में भी नहीं थे। इस बार के विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में आरएसएस की अपनी सरकार बनी है। कॉर्पोरेट और सांप्रदायिकता दोनों के मेल से ये अपने स्वार्थ का लूटतंत्र चलाने में लगे हैं। स्वतंत्रता संग्राम से लेकर मेहनतकश लोगों के मुक्ति संग्राम तक, हम जिनकी विरासत को संभाल रहे हैं, उनके विचार, प्रज्ञा और यहाँ तक कि मूर्तियों पर भी हमले हो रहे हैं। चटगांव आंदोलन के नायक मास्टरदा सूर्य सेन ने प्राण दिए, लेकिन आरएसएस के सावरकर ने 'आजादी' शब्द दोबारा न बोलने का माफीनामा देकर जेल से रिहाई पाई थी।
वामपंथियों का आरएसएस-भाजपा के साथ वैचारिक विरोध है। मोदी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने का मतलब विचारों का बदलना है। उस बदलाव का नमूना हमने रानीगंज में राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति तोड़े जाने में देखा। जिन लोगों ने सोचा था कि भाजपा के सत्ता में आने से अभया को न्याय मिलेगा, वे देख रहे हैं कि न्याय तो दूर की बात है, भाजपा सरकार के तीन महीनों में चालीस से अधिक बलात्कार की घटनाएं हुई हैं। बारुईपुर में क्या किया? लाहेक अली को नाम लेकर मुख्यमंत्री ने जेल भेजा। आरोपी को अदालत में मुकदमे के लिए पेश न करके एनकाउंटर में मार दिया। क्या लोगों ने भाजपा को इसके लिए वोट दिया था?
प्रदर्शनकारियों को डराने के लिए मुख्यमंत्री की धमकी के संदर्भ में सलीम ने कहा कि मुख्यमंत्री विधानसभा के भीतर गुंडा दमन कानून के नाम पर धमकी दे रहे हैं। वे विभाजन की राजनीति कर रहे हैं। संविधान के अनुसार ऐसा कोई कानून नहीं बनता, राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति से अभी तक इस कानून को मंजूरी भी नहीं मिली है। उससे पहले ही इस कानून के तहत किसी को गिरफ्तार करने की बात मुख्यमंत्री कैसे कह सकते हैं?
उन्होंने कहा कि वे लोगों की पिछड़ी सोच का इस्तेमाल कर रहे हैं। सांप्रदायिक विभाजन की नफरत और द्वेष लोगों के दिमाग में भरा जा रहा है। वे लोगों को अलग-थलग करना चाहते हैं। हमें लोगों को एकजुट करना होगा। बुलंद आवाज से सफेद को सफेद और काला को काला कहना होगा। नफ़रत और विभाजन की नीति के साथ कोई समझौता नहीं। इसीलिए जब उन्होंने हॉकरों को हटाया, तो हमने तुरंत विरोध संगठित किया।
डी एस पी में ठेका मजदूरों को हटाए जाने के संबंध में पत्रकारों के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सेल (SAIL) का नियम है कि ठेकेदार बदलने पर भी ठेका मजदूर नहीं बदले जा सकते। ठेका मजदूरों को हटाकर भाजपा सत्ता में आकर असल में तृणमूल-कांग्रेस के रास्ते पर ही चल रही है। भाजपा सरकार मानों 'तृणमूल-2' है।
आभास रायचौधरी ने कहा कि सत्ता में रहने की ताकत का इस्तेमाल करके भाजपा लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनकर उन्हें पीछे धकेलना चाहेगी। इसका प्रतिरोध करने के लिए वामपंथियों को ही लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता के आदर्शों को आगे बढ़ाना होगा। स्थिति कठिन है लेकिन संभावनाओं से भरी है। मैदान में उतरकर लड़ाई को मजबूत करना होगा। ढिलाई की कोई जगह नहीं है।

गौरांंग चटर्जी ने कहा कि पूरे जिले में ज्योति बसु समाज चर्चा एवं अनुसंधान केंद्र के लिए धन जुटाने में व्यापक प्रतिक्रिया मिली है। कार्यक्रम में पार्टी सदस्य पूर्व शिक्षक शांतिराम भट्टाचार्य ने ज्योति बसु समाज चर्चा एवं अनुसंधान केंद्र के लिए 15 हजार रुपये और गणशक्ति कोष के लिए 15 हजार रुपये का चेक मोहम्मद सलीम को सौंपा। पार्टी सदस्य मनोरंजन चार ने ज्योति बसु समाज चर्चा एवं अनुसंधान केंद्र, गणशक्ति कोष और निरुपम सेन पाठचक्र के लिए 5-5 हजार रुपये दिए हैं।
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साभार:बांग्ला दैनिक गणशक्ति |28 जुलाई,2026
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