वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
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महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा॥मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित॥'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह॥आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द॥कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल॥" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध॥वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी॥तैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों पर॥महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा॥मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित॥'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह॥आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द॥कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल॥" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध॥वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी॥तैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों पर॥
✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊   ✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊  
महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा
सिनेमा

महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा

उत्तम कुमार केवल एक व्यावसायिक फ़िल्म के नायक या आम दर्शकों के लिए 'गुरु' मात्र नहीं थे; वे थोड़ा-बहुत अध्ययन करने वाले, साहित्य-प्रेमी और एक संवेदनशील अभिनेता भी थे। उनकी जन्म-शताब्दी पर उन्हें केंद्र में रखकर व्यक्ति-पूजा का कोई कारण मुझे नहीं दिखता, लेकिन उनके जैसे दुर्लभ अभिनेता का सही मूल्यांकन होना अत्यंत आवश्यक है।

अपराजिता · 13 घंटे पहले · 8 मिनट पाठ
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22
मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित
राज्य

मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित

वर्ष 2026 के मुज़फ़्फ़र अहमद स्मृति पुरस्कार के लिए केरल के इतिहासकार के. एन. गणेश और इटाहार कॉलेज के बांग्ला विभागाध्यक्ष आइरीन शबनम द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों को चुना गया है। आगामी 5 अगस्त को मुज़फ़्फ़र अहमद के 138 वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

अपराजिता · 20 घंटे पहले · 3 मिनट पाठ
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'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह
साहित्य-संस्कृति

'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह

लोगों को परस्पर लड़ने से रोकने के लिए वर्गचेतना की जरूरत है। गरीब मेहनतकशों व किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिए कि तुम्हारे असली दुश्मन पूंजीपति हैं, इसलिए तुम्हें इनके हथकंडों से बचकर रहना चाहिए और इनके हत्थे चढ़ कुछ न करना चाहिए। संसार के सभी गरीबों के, चाहे वे किसी भी जाति, रंग, धर्म या राष्ट्र के हों, अधिकार एक ही हैं। तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम धर्म, रंग, नस्ल और राष्ट्रीयता व देश के भेदभाव मिटाकर एकजुट हो जाओ और सरकार की ताकत अपने हाथ में लेने का यत्न करो। भगत सिंह

अपराजिता · 20 घंटे पहले · 8 मिनट पाठ
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आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द
राष्ट्रीय

आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द

सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।

अपराजिता · कल · 3 मिनट पाठ
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कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल
साहित्य-संस्कृति

कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल

प्रेमचंद ने हिन्दुस्तान की सही तस्वीर अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से ही उजागर किया है । वे कालजयी लेखक थे । उन्होंने अपनी रचनाओं में जिन समस्याओं को उठाया था । वह आज भी हमारे समाज में विद्यमान है । प्रेमचंद ने पाप पुण्य के राक्षस और देवता नहीं रचे । उन्होंने उस धड़कन को सुना जो करोड़ों किसानों के दिल में हो रही थी ।

अपराजिता · कल · 3 मिनट पाठ
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" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोधसाहित्य-संस्कृति" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोधप्रेमचन्द उत्थानशील भारतीय सामाजिक क्रान्ति के प्रथम और अन्तिम महान् कलाकार थे। प्रेमचन्द की भाव-धारा वस्तुतः अग्रसर होती रही, किन्तु उसके शक्तिशाली आविर्भाव के रूप में कोई लेखक सामने नहीं आया। यह सम्भव भी नहीं था, क्योंकि इस क्रान्ति का नेतृत्व पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग के हाथ में था, और वह शहरों में रहता था। बाद में वह वर्ग अधिक आत्म-केन्द्रित और अधिक बुद्धि-छन्दी हो गया तथा उसने काव्य में प्रयोगवाद को जन्म दिया । किन्तु, क्या यह वर्ग कम उत्पीड़ित है ? आज तो सामाजिक विषमताएँ और भी बढ़ गयी हैं। प्रेमचन्द का महत्त्व पहले से भी अधिक बढ़ गया है। उनकी लोकप्रियता अब हिन्दी तक ही सीमित नहीं रह गयी है। अन्य भाषाओं में उनके अनुवादकर्ताओं के बीच होड़ लगी रहती है। प्रेमचन्द द्वारा सूचित सामाजिक सन्देश अभी भी अपूर्ण है। किन्तु हम जो हिन्दी के साहित्यिक है, उसकी तरफ़ विशेष ध्यान नहीं दे पाते। एक तरह से यह यथार्थ से भागना हुआ ।अपराजिता · कल · 18 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जीराज्यवामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जीअपराजिता · 2 दिन पहले · 18 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →राज्यतैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों परराजीव कुमार पाण्डेय · 2 दिन पहले · 22 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →मध्ययुगीन भक्ति-आन्दोलन का एक पहलू - मुक्तिबोधसाहित्य-संस्कृतिमध्ययुगीन भक्ति-आन्दोलन का एक पहलू - मुक्तिबोधअपराजिता · 2 दिन पहले · 82 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →गुरु पूर्णिमा की मंगलकामनाएं !साहित्य-संस्कृतिगुरु पूर्णिमा की मंगलकामनाएं !राजीव कुमार पाण्डेय · 3 दिन पहले · 8 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →
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01मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषितपढ़ना शुरू करें →02आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्दपढ़ना शुरू करें →03कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवालपढ़ना शुरू करें →04गुरु पूर्णिमा की मंगलकामनाएं !पढ़ना शुरू करें →05भाजपा के जुलूस में जलाया गया लाल झंडा - " अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं ": मोहम्मद सलीमपढ़ना शुरू करें →06आज़ादीपढ़ना शुरू करें →07मिसाइल मैन ए.पी.जे अब्दुल कलामपढ़ना शुरू करें →08धर्म!पढ़ना शुरू करें →09मुख्यमंत्री का मकसद प्रदर्शनकारियों को डराना है, न कि गुंडों पर कार्रवाई करना: सलीमपढ़ना शुरू करें →10गलत काम करके कोई बच नहीं सकता: प्रधान के इस्तीफे पर सलीम का वक्तव्यपढ़ना शुरू करें →
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" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोधसाहित्य-संस्कृति" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोधप्रेमचन्द उत्थानशील भारतीय सामाजिक क्रान्ति के प्रथम और अन्तिम महान् कलाकार थे। प्रेमचन्द की भाव-धारा वस्तुतः अग्रसर होती रही, किन्तु उसके शक्तिशाली आविर्भाव के रूप में कोई लेखक सामने नहीं आया। यह सम्भव भी नहीं था, क्योंकि इस क्रान्ति का नेतृत्व पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग के हाथ में था, और वह शहरों में रहता था। बाद में वह वर्ग अधिक आत्म-केन्द्रित और अधिक बुद्धि-छन्दी हो गया तथा उसने काव्य में प्रयोगवाद को जन्म दिया । किन्तु, क्या यह वर्ग कम उत्पीड़ित है ? आज तो सामाजिक विषमताएँ और भी बढ़ गयी हैं। प्रेमचन्द का महत्त्व पहले से भी अधिक बढ़ गया है। उनकी लोकप्रियता अब हिन्दी तक ही सीमित नहीं रह गयी है। अन्य भाषाओं में उनके अनुवादकर्ताओं के बीच होड़ लगी रहती है। प्रेमचन्द द्वारा सूचित सामाजिक सन्देश अभी भी अपूर्ण है। किन्तु हम जो हिन्दी के साहित्यिक है, उसकी तरफ़ विशेष ध्यान नहीं दे पाते। एक तरह से यह यथार्थ से भागना हुआ ।अपराजिता · कल · 18 क्लिकवामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जीराज्यवामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जीदेश का धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक संविधान खतरे में है। गरिमा और अधिकारों के साथ इंसान के जीने का अवसर खतरे में है। इनकी रक्षा के लिए हम वामपंथी जनता की एकजुटता को मजबूत करके लड़ाई लड़ रहे हैं, इसीलिए वे डर गए हैं। इसी डर की वजह से वे लाल झंडे को पैरों तले कुचल रहे हैं, जला रहे हैं और वामपंथियों के पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ कर रहे हैं। यह हमला उनके डर का ही नतीजा है।"अपराजिता · 2 दिन पहले · 18 क्लिकराज्यतैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों परराज्य में चुनावों के बाद की स्थिति में 'मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम)' की पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी का विस्तारित अधिवेशन राज्य के प्रमुख नियोजित शहरों में से एक कल्याणी में होने जा रहा है, जिसे कभी 'उद्योग नगरी, शिक्षा नगरी, हरित नगरी, निर्मल नगरी' के रूप में जाना जाता था। पिछले डेढ़ दशक के तृणमूल प्रायोजित 'विकास' के प्रभाव से वे सभी तमगे गायब हो चुके हैं और आम लोगों की बुनियादी सेवाएँ गर्त में जा चुकी हैं। यहीं आगामी 29-30 अगस्त को सीपीआई(एम) का कार्यक्रम आयोजित होगा। विस्तारित अधिवेशन के आयोजन के लिए एक स्वागत समिति का गठन किया गया है।राजीव कुमार पाण्डेय · 2 दिन पहले · 22 क्लिक
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किसान आंदोलन
दिल्ली सीमा · नवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
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आशा कर्मी हड़ताल
महाराष्ट्र · जनवरी 2026 से
वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
हड़ताल
मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंड · मार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
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शिक्षक भर्ती संघर्ष
उत्तर प्रदेश · दिसंबर 2025 से
लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
आंशिक जीत
प्रमुख विचार

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01'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़297 क्लिक02दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार289 क्लिक03‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम284 क्लिक04राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी246 क्लिक05प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?233 क्लिक06युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल224 क्लिक07नीट महाघोटाला: क्या 'सस्ते' चरित्र और 'महंगे' पँचों की बलि चढ़ेगा देश का भविष्य? - केशव भट्टड़212 क्लिक08नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी208 क्लिक09नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़208 क्लिक10"चटकल मजदूरों की स्थिति"- मंगल बेनबंशी204 क्लिक
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महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा॥मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित॥'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह॥आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द॥कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल॥" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध॥वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी॥तैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों पर॥महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा॥मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित॥'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह॥आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द॥कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल॥" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध॥वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी॥तैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों पर॥
महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा
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सिनेमा

महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा

उत्तम कुमार केवल एक व्यावसायिक फ़िल्म के नायक या आम दर्शकों के लिए 'गुरु' मात्र नहीं थे; वे थोड़ा-बहुत अध्ययन करने वाले, साहित्य-प्रेमी और एक संवेदनशील अभिनेता भी थे। उनकी जन्म-शताब्दी पर उन्हें केंद्र में रखकर व्यक्ति-पूजा का कोई कारण मुझे नहीं दिखता, लेकिन उनके जैसे दुर्लभ अभिनेता का सही मूल्यांकन होना अत्यंत आवश्यक है।

अपराजिता·13 घंटे पहले·8 मिनट पाठ·22 पाठक
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मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित

20 घंटे पहले · 3 मिनट पाठ
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'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह

20 घंटे पहले · 8 मिनट पाठ
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मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित
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मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित

वर्ष 2026 के मुज़फ़्फ़र अहमद स्मृति पुरस्कार के लिए केरल के इतिहासकार के. एन. गणेश और इटाहार कॉलेज के बांग्ला विभागाध्यक्ष आइरीन शबनम द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों को चुना गया है। आगामी 5 अगस्त को मुज़फ़्फ़र अहमद के 138 वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

अपराजिता · 3 मिनट · 6 पाठक · 20 घंटे पहले
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'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह
साहित्य-संस्कृति

'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह

लोगों को परस्पर लड़ने से रोकने के लिए वर्गचेतना की जरूरत है। गरीब मेहनतकशों व किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिए कि तुम्हारे असली दुश्मन पूंजीपति हैं, इसलिए तुम्हें इनके हथकंडों से बचकर रहना चाहिए और इनके हत्थे चढ़ कुछ न करना चाहिए। संसार के सभी गरीबों के, चाहे वे किसी भी जाति, रंग, धर्म या राष्ट्र के हों, अधिकार एक ही हैं। तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम धर्म, रंग, नस्ल और राष्ट्रीयता व देश के भेदभाव मिटाकर एकजुट हो जाओ और सरकार की ताकत अपने हाथ में लेने का यत्न करो। भगत सिंह

अपराजिता · 8 मिनट · 14 पाठक · 20 घंटे पहले
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आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द
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आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द

सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।

अपराजिता · 3 मिनट · 6 पाठक · कल
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कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल
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कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल

प्रेमचंद ने हिन्दुस्तान की सही तस्वीर अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से ही उजागर किया है । वे कालजयी लेखक थे । उन्होंने अपनी रचनाओं में जिन समस्याओं को उठाया था । वह आज भी हमारे समाज में विद्यमान है । प्रेमचंद ने पाप पुण्य के राक्षस और देवता नहीं रचे । उन्होंने उस धड़कन को सुना जो करोड़ों किसानों के दिल में हो रही थी ।

अपराजिता · 3 मिनट · 13 पाठक · कल
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महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा

सिनेमा

महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती- अरिजित मैत्रा

उत्तम कुमार केवल एक व्यावसायिक फ़िल्म के नायक या आम दर्शकों के लिए 'गुरु' मात्र नहीं थे; वे थोड़ा-बहुत अध्ययन करने वाले, साहित्य-प्रेमी और एक संवेदनशील अभिनेता भी थे। उनकी जन्म-शताब्दी पर उन्हें केंद्र में रखकर व्यक्ति-पूजा का कोई कारण मुझे नहीं दिखता, लेकिन उनके जैसे दुर्लभ अभिनेता का सही मूल्यांकन होना अत्यंत आवश्यक है।

अपराजिता
• 13 घंटे पहले • 22 क्लिक
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मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित

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मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित

वर्ष 2026 के मुज़फ़्फ़र अहमद स्मृति पुरस्कार के लिए केरल के इतिहासकार के. एन. गणेश और इटाहार कॉलेज के बांग्ला विभागाध्यक्ष आइरीन शबनम द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों को चुना गया है। आगामी 5 अगस्त को मुज़फ़्फ़र अहमद के 138 वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

अपराजिता
• 20 घंटे पहले • 6 क्लिक
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'साम्प्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह

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लोगों को परस्पर लड़ने से रोकने के लिए वर्गचेतना की जरूरत है। गरीब मेहनतकशों व किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिए कि तुम्हारे असली दुश्मन पूंजीपति हैं, इसलिए तुम्हें इनके हथकंडों से बचकर रहना चाहिए और इनके हत्थे चढ़ कुछ न करना चाहिए। संसार के सभी गरीबों के, चाहे वे किसी भी जाति, रंग, धर्म या राष्ट्र के हों, अधिकार एक ही हैं। तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम धर्म, रंग, नस्ल और राष्ट्रीयता व देश के भेदभाव मिटाकर एकजुट हो जाओ और सरकार की ताकत अपने हाथ में लेने का यत्न करो।

भगत सिंह

अपराजिता
• 20 घंटे पहले • 14 क्लिक
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आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द

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आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द

सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।

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कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल

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कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल

प्रेमचंद ने हिन्दुस्तान की सही तस्वीर अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से ही उजागर किया है । वे कालजयी लेखक थे । उन्होंने अपनी रचनाओं में जिन समस्याओं को उठाया था । वह आज भी हमारे समाज में विद्यमान है । प्रेमचंद ने पाप पुण्य के राक्षस और देवता नहीं रचे । उन्होंने उस धड़कन को सुना जो करोड़ों किसानों के दिल में हो रही थी ।

अपराजिता
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" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध

साहित्य-संस्कृति

" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध

प्रेमचन्द उत्थानशील भारतीय सामाजिक क्रान्ति के प्रथम और अन्तिम महान् कलाकार थे। प्रेमचन्द की भाव-धारा वस्तुतः अग्रसर होती रही, किन्तु उसके शक्तिशाली आविर्भाव के रूप में कोई लेखक सामने नहीं आया। यह सम्भव भी नहीं था, क्योंकि इस क्रान्ति का नेतृत्व पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग के हाथ में था, और वह शहरों में रहता था। बाद में वह वर्ग अधिक आत्म-केन्द्रित और अधिक बुद्धि-छन्दी हो गया तथा उसने काव्य में प्रयोगवाद को जन्म दिया । किन्तु, क्या यह वर्ग कम उत्पीड़ित है ? आज तो सामाजिक विषमताएँ और भी बढ़ गयी हैं। प्रेमचन्द का महत्त्व पहले से भी अधिक बढ़ गया है। उनकी लोकप्रियता अब हिन्दी तक ही सीमित नहीं रह गयी है। अन्य भाषाओं में उनके अनुवादकर्ताओं के बीच होड़ लगी रहती है। प्रेमचन्द द्वारा सूचित सामाजिक सन्देश अभी भी अपूर्ण है। किन्तु हम जो हिन्दी के साहित्यिक है, उसकी तरफ़ विशेष ध्यान नहीं दे पाते। एक तरह से यह यथार्थ से भागना हुआ ।

अपराजिता
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वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी

राज्य

वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी

देश का धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक संविधान खतरे में है। गरिमा और अधिकारों के साथ इंसान के जीने का अवसर खतरे में है। इनकी रक्षा के लिए हम वामपंथी जनता की एकजुटता को मजबूत करके लड़ाई लड़ रहे हैं, इसीलिए वे डर गए हैं। इसी डर की वजह से वे लाल झंडे को पैरों तले कुचल रहे हैं, जला रहे हैं और वामपंथियों के पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ कर रहे हैं। यह हमला उनके डर का ही नतीजा है।"

अपराजिता
• 2 दिन पहले • 18 क्लिक
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राज्य

तैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों पर

राज्य में चुनावों के बाद की स्थिति में 'मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम)' की पश्चिम बंगाल राज्य कमेटी का विस्तारित अधिवेशन राज्य के प्रमुख नियोजित शहरों में से एक कल्याणी में होने जा रहा है, जिसे कभी 'उद्योग नगरी, शिक्षा नगरी, हरित नगरी, निर्मल नगरी' के रूप में जाना जाता था। पिछले डेढ़ दशक के तृणमूल प्रायोजित 'विकास' के प्रभाव से वे सभी तमगे गायब हो चुके हैं और आम लोगों की बुनियादी सेवाएँ गर्त में जा चुकी हैं। यहीं आगामी 29-30 अगस्त को सीपीआई(एम) का कार्यक्रम आयोजित होगा। विस्तारित अधिवेशन के आयोजन के लिए एक स्वागत समिति का गठन किया गया है।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 2 दिन पहले • 22 क्लिक
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मध्ययुगीन भक्ति-आन्दोलन का एक पहलू - मुक्तिबोध

साहित्य-संस्कृति

मध्ययुगीन भक्ति-आन्दोलन का एक पहलू - मुक्तिबोध

भक्ति-आन्दोलन का जनसाधारण पर जितना व्यापक प्रभाव हुआ उतना किसी अन्य आन्दोलन का नहीं। पहली बार शूद्रों ने अपने सन्त पैदा किये, अपना साहित्य और अपने गीत सृजित किये। कबीर, रैदास, नाभा सिपी, सेना नाई, आदि-आदि महापुरुषों ने ईश्वर के नाम पर जातिवाद के विरुद्ध आवाज बुलन्द की। समाज के न्यस्त स्वार्थवादी वर्ग के विरुद्ध नया विचारवाद अवश्यम्भावी था , वह हुआ।

अपराजिता
• 2 दिन पहले • 82 क्लिक
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गुरु पूर्णिमा की मंगलकामनाएं !

साहित्य-संस्कृति

गुरु पूर्णिमा की मंगलकामनाएं !

कुछ गुरुओं को

भेज दिया गया है

बच्चे तलाशने के लिए

कम बच्चे रहे

तो गुरु सरप्लस हो जाते हैं

राजीव कुमार पाण्डेय
• 3 दिन पहले • 8 क्लिक
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लगातार आंदोलन के रास्ते से ही विभाजनकारी नीति का मुकाबला - मोहम्मद सलीम

राज्य

लगातार आंदोलन के रास्ते से ही विभाजनकारी नीति का मुकाबला - मोहम्मद सलीम

स्वतंत्रता संग्राम से लेकर मेहनतकश लोगों के मुक्ति संग्राम तक, हम जिनकी विरासत को संभाल रहे हैं, उनके विचार, प्रज्ञा और यहाँ तक कि मूर्तियों पर भी हमले हो रहे हैं। चटगांव आंदोलन के नायक मास्टरदा सूर्य सेन ने प्राण दिए, लेकिन आरएसएस के सावरकर ने 'आजादी' शब्द दोबारा न बोलने का माफीनामा देकर जेल से रिहाई पाई थी।

अपराजिता
• 3 दिन पहले • 4 क्लिक
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धर्म और हमारा स्वतंत्रता संग्राम - भगत सिंह

साहित्य-संस्कृति

धर्म और हमारा स्वतंत्रता संग्राम - भगत सिंह

बच्चे से यह कहना कि ईश्वर ही सर्वशक्तिमान है, मनुष्य कुछ भी नहीं, मिट्टी का पुतला है- बच्चे को हमेशा के लिए कमजोर बनाना है।

- भगत सिंह

अपराजिता
• 3 दिन पहले • 16 क्लिक
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जंतर-मंतर पर ज़िंदगी का कैनवास - मयूख विश्वास

अतिथि लेखन

जंतर-मंतर पर ज़िंदगी का कैनवास - मयूख विश्वास

डिवाइडर पर बैठकर एक लड़की भगत सिंह को पढ़ रही थी। उसकी आंखों और चेहरे पर उत्साह था। सिर्फ रटना नहीं, वह भगत सिंह के लिखे के मायने समझाना चाह रही थी। रात में तब भी कानों में नारे गूँज रहे थे— 'इंकलाब जिंदाबाद', 'जय भीम', 'वंदे मातरम'।

अपराजिता
• 4 दिन पहले • 9 क्लिक
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छात्र -युवा आंदोलन ने देश में नए इतिहास का  रास्ता बनाया है "- एम.ए.बेबी

राष्ट्रीय

छात्र -युवा आंदोलन ने देश में नए इतिहास का रास्ता बनाया है "- एम.ए.बेबी

छात्र-युवाओं के आंदोलन ने पूरे देश में नए इतिहास का रास्ता बनाया है। इससे पहले एक साल से अधिक समय तक किसान आंदोलन करके सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया गया था। इन दोनों आंदोलनों से आने वाले दिनों के आंदोलनों के लिए प्रेरणा लेनी होगी।

एम.ए.बेबी

सीपीआई (एम) के महासचिव

अपराजिता
• 4 दिन पहले • 12 क्लिक
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भाजपा के जुलूस में जलाया गया लाल झंडा - " अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं ": मोहम्मद सलीम

राज्य

भाजपा के जुलूस में जलाया गया लाल झंडा - " अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं ": मोहम्मद सलीम

"कल तक तो मैं जानता था कि वे नई पीढ़ी से डरते हैं, लेकिन अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं। आरएसएस की असली राजनीति क्या है, यह अब खुलेआम दिख रहा है। ये मुख्यमंत्री जब तृणमूल-कांग्रेस के नेता थे, तब इन्होंने धमकी दी थी कि कोई 'लाल भेड़िया' भी नहीं बचेगा। तृणमूल-कांग्रेस का नेता रहते हुए माओवादियों को साथ लेकर सीपीआई(एम) का सफ़ाया करने का अभियान चलाया था। उसके बावजूद लाल झंडे को ख़त्म नहीं किया जा सका; बल्कि उल्टा उनकी पुरानी पार्टी ही खत्म हो गई। लाल झंडा आज भी है और मजबूती से है, यह तो साफ़ दिख रहा है। हिटलर और मुसोलिनी इस झंडे को ख़त्म नहीं कर सके, और ये लोग अब हिटलर के पोते-परपोते बनना चाहते हैं।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

अपराजिता
• 4 दिन पहले • 24 क्लिक
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विद्यार्थी और राजनीति -भगत सिंह

साहित्य-संस्कृति

विद्यार्थी और राजनीति -भगत सिंह

सभी देशों को आजाद करवाने वाले वहां के विद्यार्थी और नौजवान ही हुआ करते हैं। क्या हिन्दुस्तान के नौजवान अलग-अलग रहकर अपना और अपने देश का अस्तित्व बचा पाएंगे ? नौजवान 1919 में विद्यार्थियों पर किए गए अत्याचार भूल नहीं सकते। वे यह भी समझते हैं कि उन्हें एक भारी क्रांति की जरूरत है। वे पढ़ें। जरूर पढ़ें। साथ ही पालिटिक्स का भी ज्ञान हासिल करें और जब जरूरत हो तो मैदान में कूद पड़ें और अपने जीवन इसी काम में लगा दें। अपने प्राणों का इसी में उत्सर्ग कर दें। वरन् बचने का कोई उपाय नजर नहीं आता।

अपराजिता
• 4 दिन पहले • 12 क्लिक
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जंतर-मंतर जेन-जी दमन : कॉरपोरेट-सत्ता गठजोड़ का बर्बर चेहरा। ~ केशव भट्टड़

विश्लेषण

जंतर-मंतर जेन-जी दमन : कॉरपोरेट-सत्ता गठजोड़ का बर्बर चेहरा। ~ केशव भट्टड़

"दबाओगे बर्बरता से जितनी आवाजें, गूँजेगी उतनी ही दूर तक इंकलाब की पुकार।"। नीट (NEET) परीक्षा धांधली और शिक्षा के बाज़ारीकरण के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहा छात्रों-युवाओं का अहिंसक आंदोलन राज्य सत्ता के सीधे निशाने पर आ गया। सरकार ने फर्जी साजिशें रचकर, संचार बंद कर और बेलगाम पुलिसिया बल प्रयोग से बतर्ज 'जलियाँवाला बाग़' हजारों प्रदर्शनकारी युवाओं को घेर कर बर्बरता से पीटा और आंदोलन को दबंगता से दबाने की कोशिश की, गोदी मीडिया की चुप्पी के बीच स्वतंत्र पत्रकारों पर सत्ता प्रायोजित हमले हुए, और प्रतिक्रिया में 'जंतर-मंतर जेन-जी दमन' से आक्रोशित छात्रों का यह आंदोलन देशभर में फैल गया। तब ब्रिटिश राज के दौरान जलियाँवाला बाग़ में अंधाधुंध गोलियाँ दागी गई थी, अब बीजेपी राज में जंतर-मंतर जेन-जी दमन के दौरान कील लगी लाठियाँ, आँसू गैस, वाटर कैनन, शॉक बेटन, पेलेट गन के साथ-साथ लात-बूटों,थप्पडें और भद्दी गालियाँ दागी गई हैं। तब देश गुलाम था, अब देश आजाद है, दुनियाँ का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। तब भी भारत डोला था, अब भी भारत डोला है। तब तारीख थी 13 अप्रैल 1919, अब तारीख थी 20 जुलाई 2026। और शाम होते-होते छात्रों-युवाओं ने जंतर-मंतर पर वापस कब्ज़ा कर यह साबित कर दिया कि कॉर्पोरेटऔर सत्ता गठजोड़ की बर्बरता से विचारों और क्रांति को दबाया नहीं जा सकता। बुरी तरह पुलिस और अर्धसैनिक बलों से मार खाकर भी बंद मुट्ठी तनकर उठी हुई थी। युवा भारत के इस जोश-जुनून-जज्बे को सलाम।

केशव कुमार भट्टड़
• 5 दिन पहले • 181 क्लिक
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आज राज्यभर में प्रदर्शन का आह्वान - हमले का प्रतिरोध देखते ही भागे भाजपा के गुंडे

राज्य

आज राज्यभर में प्रदर्शन का आह्वान - हमले का प्रतिरोध देखते ही भागे भाजपा के गुंडे

"यह देखकर हैरानी हो रही है कि राज्य पुलिस की मौजूदगी में भाजपा हमला करने आई थी। उनके हमले का कार्यकर्ताओं ने मुंहतोड़ जवाब दिया और भाजपा को मैदान छोड़कर भागना पड़ा। आने वाले समय में भाजपा को पश्चिम बंगाल और देश छोड़कर भी भागना पड़ेगा, क्योंकि मैदान पर अब बंगाल के युवाओं और आम लोकतंत्र प्रेमी जनता का कब्ज़ा होगा। इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए लिखित आवेदन देकर हॉल किराए पर लिया गया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी थी, लेकिन आज की घटना ने पुलिस की विफलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। दरअसल, किसी भी लोकतांत्रिक कार्यक्रम पर हमला करना भाजपा की संस्कृति बन चुकी है। वे राज्य की संस्कृति, कूचबिहार की संस्कृति और पंचानन बर्मा की परंपरा को नष्ट करना चाहते हैं।"

ध्रुवुज्योति साहा

डीवाईएफआई पश्चिम बंगाल के सचिव

अपराजिता
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संघर्ष के नक्शे पर राजधानी का राजपथ - डॉ. हिमाद्रि शेखर सरकार

अतिथि लेखन

संघर्ष के नक्शे पर राजधानी का राजपथ - डॉ. हिमाद्रि शेखर सरकार

वर्षा में भींगी मुंबई के राजपथ पर खड़ी वह अकेली युवती केवल एक प्रदर्शनकारी की छवि नहीं है; वह आज के भारत के विवेक का प्रतीक है। उसका स्पर्श बख्तरबंद गाड़ी के लिए नहीं; हमारी सामाजिक चेतना पर है। उसका मौन प्रश्न हममें से प्रत्येक के लिए है।

अपराजिता
• 5 दिन पहले • 43 क्लिक
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जनता का साहित्य किसे कहते हैं ? - मुक्तिबोध

साहित्य-संस्कृति

जनता का साहित्य किसे कहते हैं ? - मुक्तिबोध

जनता के साहित्य से अर्थ है ऐसा साहित्य जो जनता के जीवन-मूल्यों को, जनता के जीवनादर्शों को, प्रतिष्ठापित करता हो, उसे अपने मुक्तिपथ पर अग्रसर करता हो। इस मुक्तिपथ का अर्थ राजनैतिक मुक्ति से लगाकर अज्ञान से मुक्ति तक है। अतः इसमें प्रत्येक प्रकार का साहित्य सम्मिलित है, बशर्ते कि वह सचमुच उसे मुक्तिपथ पर अग्रसर करे।

अपराजिता
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क्या 'चाणक्य' की चाल ही पड़ी उल्टी? जवाबदेही की ज़िम्मेदारी  अब अमित शाह पर

राष्ट्रीय

क्या 'चाणक्य' की चाल ही पड़ी उल्टी? जवाबदेही की ज़िम्मेदारी अब अमित शाह पर

भाजपा नेता इससे भी ज़्यादा हैरान इस बात पर हैं कि उनके 'चाणक्य' पूरे घटनाक्रम में बिल्कुल चुप हैं। किसी भी घटना में नरेंद्र मोदी के 'मुश्किल आसान' कहे जाने वाले अमित शाह के इस आचरण को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज़ हो गई हैं। दिल्ली के प्रशासनिक हलकों में चर्चा कुछ और ही चल रही है— कहा जा रहा है कि 'चाणक्य' की चाल के कारण ही इस बार 'साहब' को घुटनों पर आना पड़ा है।

अपराजिता
• 5 दिन पहले • 11 क्लिक
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आज़ादी

साहित्य-संस्कृति

आज़ादी

" ग़ुलामी और आज़ादी में

सिर्फ़

इतना ही फ़र्क है

ग़ुलामी में

आदमी रोज़ मरता है

आज़ादी में

कभी मौत आती ही नहीं "।

अपराजिता
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मिसाइल मैन ए.पी.जे अब्दुल कलाम

श्रद्धांजलि

मिसाइल मैन ए.पी.जे अब्दुल कलाम

सपनों का पंख लगा

चलते रहे मंजिल ओर

आयी राह में काँटें

फूल समझ उसे

गले से लगा लिया

अपराजिता
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धर्म!

साहित्य-संस्कृति

धर्म!

जब बेतहाशा बिकने लगे

या बेचा जाने लगे

तब मरने लगता है

उसके होने का मर्म

राजीव कुमार पाण्डेय
• 6 दिन पहले • 13 क्लिक
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प्रमुख विचार

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'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़297 क्लिक
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संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

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" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध
साहित्य-संस्कृति

" मेरी माँ ने मुझे प्रेमचन्द का भक्त बनाया " - मुक्तिबोध

प्रेमचन्द उत्थानशील भारतीय सामाजिक क्रान्ति के प्रथम और अन्तिम महान् कलाकार थे। प्रेमचन्द की भाव-धारा वस्तुतः अग्रसर होती रही, किन्तु उसके शक्तिशाली आविर्भाव के रूप में कोई लेखक सामने नहीं आया। यह सम्भव भी नहीं था, क्योंकि इस क्रान्ति का नेतृत्व पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग के हाथ में था, और वह शहरों में रहता था। बाद में वह वर्ग अधिक आत्म-केन्द्रित और अधिक बुद्धि-छन्दी हो गया तथा उसने काव्य में प्रयोगवाद को जन्म दिया । किन्तु, क्या यह वर्ग कम उत्पीड़ित है ? आज तो सामाजिक विषमताएँ और भी बढ़ गयी हैं। प्रेमचन्द का महत्त्व पहले से भी अधिक बढ़ गया है। उनकी लोकप्रियता अब हिन्दी तक ही सीमित नहीं रह गयी है। अन्य भाषाओं में उनके अनुवादकर्ताओं के बीच होड़ लगी रहती है। प्रेमचन्द द्वारा सूचित सामाजिक सन्देश अभी भी अपूर्ण है। किन्तु हम जो हिन्दी के साहित्यिक है, उसकी तरफ़ विशेष ध्यान नहीं दे पाते। एक तरह से यह यथार्थ से भागना हुआ ।

अपराजिता · कल
वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी
राज्य

वामपंथी देशवासियों के लिए लड़ रहे हैं, इसीलिए लाल झंडे का अपमान कर रही है भाजपा - मीनाक्षी मुखर्जी

अपराजिता · 2 दिन पहले
राज्य

तैयार हो रहा है कल्याणी, विस्तारित अधिवेशन की तैयारियाँ जोरों पर

राजीव कुमार पाण्डेय · 2 दिन पहले
3 मिनटसमझें सिर्फ 3 मिनट में
01

मुज़फ़्फ़र अहमद पुरस्कार घोषित

वर्ष 2026 के मुज़फ़्फ़र अहमद स्मृति पुरस्कार के लिए केरल के इतिहासकार के. एन. गणेश और इटाहार कॉलेज के बांग्ला विभागाध्यक्ष आइरीन शबनम द्वारा लिखी गई दो पुस्तकों को चुना गया है। आगामी 5 अगस्त को मुज़फ़्फ़र अहमद के 138 वें जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

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02

आइशी घोष की गिरफ्तारी वारंट रद्द

सीपीआईएम के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि 2021 के एक पुराने मामले को अचानक सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से सामने लाया गया है। छात्र और युवा आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण ही आइशी घोष को निशाना बनाया गया है।

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03

कालजयी प्रेमचंद - श्रेया जायसवाल

प्रेमचंद ने हिन्दुस्तान की सही तस्वीर अपनी कहानियों और उपन्यासों के माध्यम से ही उजागर किया है । वे कालजयी लेखक थे । उन्होंने अपनी रचनाओं में जिन समस्याओं को उठाया था । वह आज भी हमारे समाज में विद्यमान है । प्रेमचंद ने पाप पुण्य के राक्षस और देवता नहीं रचे । उन्होंने उस धड़कन को सुना जो करोड़ों किसानों के दिल में हो रही थी ।

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04

गुरु पूर्णिमा की मंगलकामनाएं !

कुछ गुरुओं को

भेज दिया गया है

बच्चे तलाशने के लिए

कम बच्चे रहे

तो गुरु सरप्लस हो जाते हैं

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05

भाजपा के जुलूस में जलाया गया लाल झंडा - " अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं ": मोहम्मद सलीम

"कल तक तो मैं जानता था कि वे नई पीढ़ी से डरते हैं, लेकिन अब देख रहा हूँ कि वे लाल झंडे से ही डर रहे हैं। आरएसएस की असली राजनीति क्या है, यह अब खुलेआम दिख रहा है। ये मुख्यमंत्री जब तृणमूल-कांग्रेस के नेता थे, तब इन्होंने धमकी दी थी कि कोई 'लाल भेड़िया' भी नहीं बचेगा। तृणमूल-कांग्रेस का नेता रहते हुए माओवादियों को साथ लेकर सीपीआई(एम) का सफ़ाया करने का अभियान चलाया था। उसके बावजूद लाल झंडे को ख़त्म नहीं किया जा सका; बल्कि उल्टा उनकी पुरानी पार्टी ही खत्म हो गई। लाल झंडा आज भी है और मजबूती से है, यह तो साफ़ दिख रहा है। हिटलर और मुसोलिनी इस झंडे को ख़त्म नहीं कर सके, और ये लोग अब हिटलर के पोते-परपोते बनना चाहते हैं।"

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

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06

आज़ादी

" ग़ुलामी और आज़ादी में

सिर्फ़

इतना ही फ़र्क है

ग़ुलामी में

आदमी रोज़ मरता है

आज़ादी में

कभी मौत आती ही नहीं "।

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07

मिसाइल मैन ए.पी.जे अब्दुल कलाम

सपनों का पंख लगा

चलते रहे मंजिल ओर

आयी राह में काँटें

फूल समझ उसे

गले से लगा लिया

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धर्म!

जब बेतहाशा बिकने लगे

या बेचा जाने लगे

तब मरने लगता है

उसके होने का मर्म

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मुख्यमंत्री का मकसद प्रदर्शनकारियों को डराना है, न कि गुंडों पर कार्रवाई करना: सलीम

"संसदीय नियमों को ताक पर रखकर, मुख्यमंत्री विधानसभा में किसी गैंग लीडर की तरह धमकियां दे रही हैं। उन्होंने गुंडों पर कार्रवाई के बहाने गुंडागर्दी बढ़ाने और उस प्रक्रिया में वर्दीधारी पुलिस को शामिल करने की एक मिसाल कायम की है। क्या इस तरह नाम लेकर प्रदर्शनकारियों को धमकाना सही है?"

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गलत काम करके कोई बच नहीं सकता: प्रधान के इस्तीफे पर सलीम का वक्तव्य

"अगर आख़िरकार आपको अपनी पतलून उतारनी ही थी, तो आपने अपना तमाशा क्यों बनवाया?"

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LIVEसक्रिय संघर्ष ट्रैकर
किसान आंदोलन
दिल्ली सीमानवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
सक्रिय
आशा कर्मी हड़ताल
महाराष्ट्रजनवरी 2026 से
वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
हड़ताल
मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंडमार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
सक्रिय
शिक्षक भर्ती संघर्ष
उत्तर प्रदेशदिसंबर 2025 से
लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
आंशिक जीत

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