छात्र-युवाओं के आंदोलन ने पूरे देश में नए इतिहास का रास्ता बनाया है। इससे पहले एक साल से अधिक समय तक किसान आंदोलन करके सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया गया था। इन दोनों आंदोलनों से आने वाले दिनों के आंदोलनों के लिए प्रेरणा लेनी होगी।
एम.ए.बेबी
सीपीआई (एम) के महासचिव
" छात्र-युवा आंदोलन ने
देश में नए इतिहास का
रास्ता बनाया है "
एम.ए.बेबी
सीपीआई (एम) के महासचिव

नई दिल्ली, 27 जुलाई— छात्र-युवाओं के आंदोलन ने पूरे देश में नए इतिहास का रास्ता बनाया है। इससे पहले एक साल से अधिक समय तक किसान आंदोलन करके सरकार को झुकने पर मजबूर कर दिया गया था। इन दोनों आंदोलनों से आने वाले दिनों के आंदोलनों के लिए प्रेरणा लेनी होगी। सोमवार को नई दिल्ली में एसएफआई (SFI) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में संगठन के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई(एम) के पोलित ब्यूरो सदस्य एम ए बेबी ने यह बात कही।
हरकिशन सिंह सुरजीत भवन में 'जश्न-ए-इंकलाब' नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन एसएफआई केंद्रीय कमेटी द्वारा किया गया था। हाल ही में हुए देशव्यापी परीक्षा-धांधली विरोधी आंदोलन में भाग लेने वाले कार्यकर्ताओं को इस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया। एसएफआई ने इस आंदोलन को एक 'ऐतिहासिक विजय' करार दिया। संघर्ष और आंदोलन के इस जश्न में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर एक महीने तक चले आंदोलन में हिस्सा लेने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही, जिन्होंने भूख हड़ताल में हिस्सा लिया था और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई में जो घायल हुए थे, उन्हें भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व ओलंपियन पहलवान बजरंग पूनिया, पूर्व भारतीय वॉलीबॉल खिलाड़ी जगमती सांगवान और अभिनेता तथा 'सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के प्रवक्ता सुधीर सांगवान उपस्थित थे। रविवार को ही एसएफआई ने दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य प्रगतिशील छात्र संगठनों के साथ मिलकर नॉर्थ कैंपस के आर्ट्स फैकल्टी से विजय नगर तक एक 'विजय जुलूस' का आयोजन किया था। देशव्यापी छात्र आंदोलन की जीत का जश्न मनाने के लिए ही वह जुलूस निकाला गया था। आज का कार्यक्रम भी उसी उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में सीजेपी (CJP) के सह-संस्थापक और अभिनेता सुधीर सांगवान ने कहा कि जंतर-मंतर आंदोलन की आत्मा एसएफआई जैसे वामपंथी छात्र संगठन थे। इस आंदोलन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झुकने पर मजबूर किया और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने के लिए विवश कर दिया। सांगवान ने कहा कि सीजेपी का कोई एकल कार्यक्रम नहीं था और एसएफआई तथा एआईएसएफ (AISF) जैसे संगठनों के साथ सलाह-मविरा करके ही हर दिन के विरोध-प्रदर्शन का तरीका तय किया जाता था। एसएफआई के साथ अब ऐसा रिश्ता बन गया है कि हर किसी को नाम से बुलाया जा सकता है। भारी कष्टों और त्याग के बाद एसएफआई इस संघर्ष में मजबूती से डटी रही। सीपीआई (एम) के वरिष्ठ नेता एम ए बेबी ने संघर्ष में भाग लेने वालों और आत्मत्याग करने वालों की ओर से सांगवान को एसएफआई केंद्रीय कमेटी का बैच और भगत सिंह पर एक पुस्तक भेंट की।
एम ए बेबी ने अपने संबोधन में संघर्ष की शुरुआत करने वाले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को बधाई दी। बेबी ने कहा कि इस छात्र-युवा आंदोलन ने देश के इतिहास में एक नया महाकाव्य लिखा है। नई पीढ़ी ने मोदी के 56-इंच के सीने को पराजित किया है। बेबी ने कहा कि वामपंथी सांसदों ने इस आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पोलित ब्यूरो सदस्य अशोक धवले, मरियम धवले, बी वी राघवुलु, बीजू कृष्णन, केंद्रीय कमेटी के सदस्य पीके श्रीमती, एआर सिंधु, सांसद आमराराम, के राधाकृष्णन, सचिदानंदम, जॉन ब्रिटास, एए रहीम, वी शिवदासन, एसएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम साजी, महासचिव सृजन भट्टाचार्य और अन्य नेताओं ने इसमें भाग लिया। विजय उत्सव के दौरान एक वीडियो प्रदर्शित किया गया, साथ ही जन नाट्य मंच का नाटक और संगीत प्रस्तुत किया गया।
एसएफआई नेताओं ने बताया कि 40 दिनों के इस आंदोलन में पेपर लीक, परीक्षाओं में धांधली और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को लेकर छात्र-छात्राएं, युवा, अभिभावक और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एकजुट हुए थे। इस आंदोलन के दौरान देश-विदेश में 1000 से अधिक विरोध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और विभिन्न प्रदर्शनों में भाग लेने के दौरान उनके एक हज़ार से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्रों के सामूहिक संघर्ष की विजय बताते हुए एसएफआई ने कहा कि इस आंदोलन ने साबित कर दिया है कि निरंतर लोकतांत्रिक आंदोलनों के माध्यम से सरकार को जनता की मांगों पर प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
हालांकि, एसएफआई नेताओं ने स्पष्ट किया कि मंत्री का इस्तीफा केवल एक महत्वपूर्ण पड़ाव (मील का पत्थर) है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को वापस लेने और सरकारी शिक्षा व्यवस्था में ढांचागत सुधारों सहित बड़ी मांगों के पूरा होने तक एसएफआई अपना आंदोलन जारी रखेगी।
.
.
साभार बांग्ला दैनिक गणशक्ति | 28 जुलाई,2026
टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...