मंगलवार, 02 जून 2026
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वाम की आवाज़ (Vaam ki Aawaz)

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बुलडोजर के सामने एक और रात पर कब्जा - कलतान दासगुप्तामजदूरों की लड़ाई के साथ सामाजिक न्याय के संघर्ष को जोड़कर ही भारतीय वामपंथी आगे बढ़ेंगे - एम ए बेबीदिवंगत जन नेता कामरेड बिष्णु मोहंती को श्रद्धांजलि।सरकारी बस ही नहीं तो मुफ्त सफर का क्या फायदा!स्मार्ट मीटर रद्द करने की माँग को लेकर उत्तर प्रदेश के जिलों में सीपीआई(एम) का विरोध प्रदर्शनपुरुलिया में बुलडोज़र कार्रवाई के ख़िलाफ़ फूटा गुस्सानौ जिलों से धान की खरीद नहीं करेगी पश्चिम बंगाल सरकारश्रमिकों की रैली से हॉकरों की आजीविका वापस लाने की लड़ाई जारी रखने का ऐलानबुलडोजर के सामने एक और रात पर कब्जा - कलतान दासगुप्तामजदूरों की लड़ाई के साथ सामाजिक न्याय के संघर्ष को जोड़कर ही भारतीय वामपंथी आगे बढ़ेंगे - एम ए बेबीदिवंगत जन नेता कामरेड बिष्णु मोहंती को श्रद्धांजलि।सरकारी बस ही नहीं तो मुफ्त सफर का क्या फायदा!स्मार्ट मीटर रद्द करने की माँग को लेकर उत्तर प्रदेश के जिलों में सीपीआई(एम) का विरोध प्रदर्शनपुरुलिया में बुलडोज़र कार्रवाई के ख़िलाफ़ फूटा गुस्सानौ जिलों से धान की खरीद नहीं करेगी पश्चिम बंगाल सरकारश्रमिकों की रैली से हॉकरों की आजीविका वापस लाने की लड़ाई जारी रखने का ऐलान
बुलडोजर के सामने एक और रात पर कब्जा  - कलतान दासगुप्ता

राज्य

बुलडोजर के सामने एक और रात पर कब्जा - कलतान दासगुप्ता

भाजपा असल में कॉर्पोरेट पूंजी के हितों के साथ ही चलती है। यह पार्टी कॉर्पोरेट घरानों और व्यापारियों के भारी-भरकम पैसे से चल रही है। भाजपा ने जिनका नमक खाया है, उनका गुणगान करने के लिए ही वह स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म और रेलवे के अधीन आने वाली खाली जमीनें उद्योगपतियों के हाथों में सौंपना चाहती है। हमारी मांग है कि विधानसभा में तुरंत इन गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों के पेट पर लात मारने वाली व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई जाए। विधानसभा में इस लापरवाह हॉकर बेदखली के खिलाफ और उनके वास्तविक पुनर्वास के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। रेल हॉकर समस्या को लेकर रेलवे अधिकारियों, रेल हॉकर संगठनों के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक बुलाई जानी चाहिए।

श्रेया जायसवाल
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मजदूरों की लड़ाई के साथ सामाजिक न्याय के संघर्ष को जोड़कर ही भारतीय वामपंथी आगे बढ़ेंगे  - एम ए बेबी

राष्ट्रीय

मजदूरों की लड़ाई के साथ सामाजिक न्याय के संघर्ष को जोड़कर ही भारतीय वामपंथी आगे बढ़ेंगे - एम ए बेबी

  1. 01. जनता को एक अलग और बेहतर रास्ता दिखाने की सोच सिर्फ वामपंथ के पास ही है। यही राजनीतिक माहौल भारत में वामपंथ के भविष्य को सुरक्षित करता है। 02. वामपंथी चुनावों से अलग हटकर खुद को दोबारा खड़ा नहीं कर पाए, तो सिर्फ वामपंथ का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। नोएडा में आंदोलन कर रहे कॉन्ट्रैक्ट (ठेका) मजदूरों के साथ खड़े होना इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। वहां कोई और राजनीतिक दल या ट्रेड यूनियन उस तरह आगे नहीं आया। कामकाजी और मेहनत करने वाले लोगों की आजादी और हक की आवाज बनना ही वामपंथी राजनीति की सबसे बड़ी खासियत है। 03. चुनाव के समय बीजेपी के खिलाफ अलग-अलग राजनीतिक ताकतों को राज्यों की जमीनी हकीकत के हिसाब से एक साथ लाना संभव होगा। संसद के अंदर भी तालमेल बना रहेगा। लेकिन कुछ राज्यों में स्थानीय कारणों से जमीन पर एक साथ मिलकर चलना वाकई मुश्किल है, और इस कड़वी सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। 04. जनता वामपंथियों से बहुत ऊंचे दर्जे के काम की उम्मीद रखती है।

'एक इंटरव्यू में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [(सीपीआई (एम)] के महासचिव एम ए बेबी ने हाल ही में खत्म हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों और वामपंथ के भविष्य पर खुलकर चर्चा की।

केशव कुमार भट्टड़
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दिवंगत जन नेता कामरेड बिष्णु मोहंती को श्रद्धांजलि।

श्रद्धांजलि

दिवंगत जन नेता कामरेड बिष्णु मोहंती को श्रद्धांजलि।

कॉमरेड बिष्णु मोहंती ओडिशा के कम्युनिस्ट आंदोलन के बहुत ही वफादार, सेनानी और लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन मजदूर, किसान, कृषि मजदूर, युवा, छात्र, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और समाज के सभी शोषित और वंचित तबकों के मुक्ति संग्राम में समर्पित कर दिया।

डॉ.सूर्यकांत मिश्र

सीपीआई (एम) के पूर्व पोलिट ब्यूरो सदस्य

श्रेया जायसवाल
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बुलडोजर के सामने एक और रात पर कब्जा  - कलतान दासगुप्ता

राज्य

बुलडोजर के सामने एक और रात पर कब्जा - कलतान दासगुप्ता

भाजपा असल में कॉर्पोरेट पूंजी के हितों के साथ ही चलती है। यह पार्टी कॉर्पोरेट घरानों और व्यापारियों के भारी-भरकम पैसे से चल रही है। भाजपा ने जिनका नमक खाया है, उनका गुणगान करने के लिए ही वह स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म और रेलवे के अधीन आने वाली खाली जमीनें उद्योगपतियों के हाथों में सौंपना चाहती है। हमारी मांग है कि विधानसभा में तुरंत इन गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के लोगों के पेट पर लात मारने वाली व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई जाए। विधानसभा में इस लापरवाह हॉकर बेदखली के खिलाफ और उनके वास्तविक पुनर्वास के मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। रेल हॉकर समस्या को लेकर रेलवे अधिकारियों, रेल हॉकर संगठनों के प्रतिनिधियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक बुलाई जानी चाहिए।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
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मजदूरों की लड़ाई के साथ सामाजिक न्याय के संघर्ष को जोड़कर ही भारतीय वामपंथी आगे बढ़ेंगे  - एम ए बेबी

राष्ट्रीय

मजदूरों की लड़ाई के साथ सामाजिक न्याय के संघर्ष को जोड़कर ही भारतीय वामपंथी आगे बढ़ेंगे - एम ए बेबी

  1. 01. जनता को एक अलग और बेहतर रास्ता दिखाने की सोच सिर्फ वामपंथ के पास ही है। यही राजनीतिक माहौल भारत में वामपंथ के भविष्य को सुरक्षित करता है। 02. वामपंथी चुनावों से अलग हटकर खुद को दोबारा खड़ा नहीं कर पाए, तो सिर्फ वामपंथ का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। नोएडा में आंदोलन कर रहे कॉन्ट्रैक्ट (ठेका) मजदूरों के साथ खड़े होना इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। वहां कोई और राजनीतिक दल या ट्रेड यूनियन उस तरह आगे नहीं आया। कामकाजी और मेहनत करने वाले लोगों की आजादी और हक की आवाज बनना ही वामपंथी राजनीति की सबसे बड़ी खासियत है। 03. चुनाव के समय बीजेपी के खिलाफ अलग-अलग राजनीतिक ताकतों को राज्यों की जमीनी हकीकत के हिसाब से एक साथ लाना संभव होगा। संसद के अंदर भी तालमेल बना रहेगा। लेकिन कुछ राज्यों में स्थानीय कारणों से जमीन पर एक साथ मिलकर चलना वाकई मुश्किल है, और इस कड़वी सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। 04. जनता वामपंथियों से बहुत ऊंचे दर्जे के काम की उम्मीद रखती है।

'एक इंटरव्यू में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [(सीपीआई (एम)] के महासचिव एम ए बेबी ने हाल ही में खत्म हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों और वामपंथ के भविष्य पर खुलकर चर्चा की।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
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दिवंगत जन नेता कामरेड बिष्णु मोहंती को श्रद्धांजलि।

श्रद्धांजलि

दिवंगत जन नेता कामरेड बिष्णु मोहंती को श्रद्धांजलि।

कॉमरेड बिष्णु मोहंती ओडिशा के कम्युनिस्ट आंदोलन के बहुत ही वफादार, सेनानी और लोकप्रिय नेता थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन मजदूर, किसान, कृषि मजदूर, युवा, छात्र, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और समाज के सभी शोषित और वंचित तबकों के मुक्ति संग्राम में समर्पित कर दिया।

डॉ.सूर्यकांत मिश्र

सीपीआई (एम) के पूर्व पोलिट ब्यूरो सदस्य

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
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सरकारी बस ही नहीं तो मुफ्त सफर का क्या फायदा!

राज्य

सरकारी बस ही नहीं तो मुफ्त सफर का क्या फायदा!

सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त सफर की सुविधा लागू होने के बावजूद, राज्य की महिला यात्रियों को इसका लाभ उठाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार से महिलाओं की मांग है, "डिपो और सड़कों पर सरकारी बसें हैं ही नहीं! पहले सरकारी बसों की संख्या बढ़ाइए, वरना हम इस मुफ्त सफर की सुविधा का लाभ कैसे उठा पाएंगे?"

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
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स्मार्ट मीटर रद्द करने की माँग को लेकर  उत्तर प्रदेश के जिलों में सीपीआई(एम) का विरोध प्रदर्शन

राष्ट्रीय

स्मार्ट मीटर रद्द करने की माँग को लेकर उत्तर प्रदेश के जिलों में सीपीआई(एम) का विरोध प्रदर्शन

बिजली एक आवश्यक जनसेवा है, मुनाफा कमाने का जरिया नहीं। इसलिए सरकार को निजीकरण की नीति वापस लेकर सरकारी क्षेत्र को और मजबूत करना चाहिए, ताकि आम लोगों को किफायती दरों पर और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली सेवा मिल सके।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
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पुरुलिया में बुलडोज़र कार्रवाई के ख़िलाफ़ फूटा गुस्सा

राज्य

पुरुलिया में बुलडोज़र कार्रवाई के ख़िलाफ़ फूटा गुस्सा

पिछले कुछ दिनों में पुरुलिया शहर के ज़िला कोर्ट और सदर अस्पताल परिसर के आसपास बुलडोज़र चलाकर सैकड़ों दुकानदारों को उजाड़ दिया गया है। इन लोगों को मात्र कुछ घंटों का नोटिस देकर दुकानें ख़ाली करने को कहा गया था। कोई नहीं जानता कि कल उनके घर में चूल्हा कैसे जलेगा ? बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च कहाँ से आएगा ? और बीमारी में इलाज कैसे होगा?आज भी लोग उस मलबे के बीच खड़े होकर रो रहे हैं और कह रहे हैं कि उनका सब कुछ लुट गया है। ऐसे समय में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) उनके साथ आकर खड़े हुए हैं।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
01 जून 202616 क्लिक
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नौ जिलों से धान की खरीद नहीं करेगी पश्चिम बंगाल सरकार

राज्य

नौ जिलों से धान की खरीद नहीं करेगी पश्चिम बंगाल सरकार

राज्य के नौ ज़िलों के किसानों को रबी सीज़न के दौरान अपनी धान बेचने का मौका ही नहीं मिलेगा। इसके अलावा, जिन ज़िलों में सरकार धान की खरीद करेगी भी, वहाँ भी सभी किसान केंद्रीय खरीद केंद्रों पर अपनी उपज सफलतापूर्वक नहीं बेच पाएँगे।

राजीव कुमार पाण्डेयराजीव कुमार पाण्डेय
01 जून 20268 क्लिक
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श्रमिकों की रैली से हॉकरों की आजीविका वापस लाने की लड़ाई जारी रखने का ऐलान

राज्य

श्रमिकों की रैली से हॉकरों की आजीविका वापस लाने की लड़ाई जारी रखने का ऐलान

हमारे देश में हॉकर कानून है। उसमें कहा गया है कि बिना पुनर्वास के हॉकरों को नहीं हटाया जा सकता। रेलवे में जो लोग स्टाल लगाते हैं, उनके लिए रोजगार का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। लाखों नौकरियों का वादा करने के बाद भी सरकार ने इसकी कोई व्यवस्था नहीं की। बिना कोई जिम्मेदारी निभाए केंद्र और राज्य सरकार गरीब लोगों पर हमला कर रही है।

राजीव कुमार पाण्डेयराजीव कुमार पाण्डेय
01 जून 20268 क्लिक
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35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, आज ही होगा विभागों का बंटवारा

ब्लॉग

35 भाजपा विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली, आज ही होगा विभागों का बंटवारा

पश्चिम बंगाल मंत्रीमण्डल का विस्तार। सोमवार को लोकभवन में राज्यपाल आर.एन. रवि ने 35 भाजपा विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई। आज ही होगा विभागों का बंटवारा। कुल 13 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है। आज दोपहर बाद 'नवान्न' (सचिवालय) में मंत्री पद की शपथ लेने वाले विधायकों के साथ बैठक कर विभाग सौंपे जाएंगे।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
01 जून 202630 क्लिक
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आधी रात को दमदम में बुलडोजर का कहर

राज्य

आधी रात को दमदम में बुलडोजर का कहर

राज्य में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही दिनों के भीतर, गरीबों की आजीविका के एकमात्र साधन पर बुलडोजर चला दिए गए। सैकड़ों गरीब लोगों को मानो पेट में लात मारकर सड़क पर बैठा दिया गया। इस स्थिति में वे कैसे जीवित रहेंगे? वे अपने परिवारों का पेट कैसे भरेंगे? ये फेरीवाले अब इस चिंता से लगभग अधमरे हैं।

राजीव कुमार पाण्डेयराजीव कुमार पाण्डेय
01 जून 202622 क्लिक
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ईंधन की कीमतों में कम करने की माँग को लेकर रानीगंज में जुलूस

राज्य

ईंधन की कीमतों में कम करने की माँग को लेकर रानीगंज में जुलूस

पश्चिम बंगाल में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद आम जनता पर बोझ बढ़ता ही जा रहा है। अगर भाजपा सरकार की नींद नहीं खुली, तो इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
01 जून 20263 क्लिक
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राज्य समिति के आह्वान पर   242 लोगों ने किया रक्तदान

राज्य

राज्य समिति के आह्वान पर 242 लोगों ने किया रक्तदान

"रक्त का कोई जाति या धर्म नहीं होता। मरीज के शरीर के लिए जरूरी खून की आपूर्ति में किसी भी जाति या धर्म का भेदभाव नहीं होता। रक्तदान मानवता की इसी महान परंपरा को दर्शाता है।"

गर्मियों के मौसम में होने वाली खून की कमी को दूर करने के लिए हर साल सीपीआई(एम), पश्चिम बंगाल की राज्य समिती की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाता है। यह शिविर जहाँ एक तरफ खून की कमी को पूरा करने का एक प्रयास था- इस शिविर में कुल 242 लोगों ने रक्तदान किया, जिनमें 15 महिला रक्तदाता भी शामिल थीं- वहीँ दूसरी तरफ इसके जरिए लोगों के बीच एकता और भाईचारे का संदेश भी दिया गया।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
31 मई 202631 क्लिक
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क्या गंगा के घाट अडानी को सौंप रहा है पोर्ट ट्रस्ट?

राज्य

क्या गंगा के घाट अडानी को सौंप रहा है पोर्ट ट्रस्ट?

मरम्मत या सौंदर्यीकरण को केवल एक मुखौटे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। नीमतल्ला श्मशान घाट के बाद और मिलेनियम पार्क से पहले तक पोर्ट ट्रस्ट की कई ऐसी जमीनें हैं जो खाली पड़ी हैं। इसी इलाके में कोलकाता का बड़ा फूल बाजार (मल्लिक घाट फ्लावर मार्केट) भी स्थित है। संभवतः इसी जगह पर अडानी समूह अपना निवेश करेगा।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
31 मई 20264 क्लिक
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तृणमूल-कांग्रेस की अहमियत वापस लाने की कोशिश कर रही है भाजपा-  मोहम्मद सलीम

राज्य

तृणमूल-कांग्रेस की अहमियत वापस लाने की कोशिश कर रही है भाजपा- मोहम्मद सलीम

"आरएसएस की पत्रिका में सीपीआई (एम) को लेकर भाजपा को आगाह किया गया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी वामपंथी लाल झंडा हाथ में लेकर लोगों के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध कैसे कर पा रहे हैं! यही वजह है कि वे मानते हैं कि तृणमूल-कांग्रेस को फिर से जिंदा करना जरूरी है। लेकिन पुलिस के घेरे के बिना तो तृणमूल-कांग्रेस के लिए कुछ भी करना मुमकिन नहीं है, इसलिए आज की घटना के बाद शायद आप देखेंगे कि उन्हें फिर से जेड प्लस (Z+) श्रेणी की सुरक्षा दे दी जाएगी। महत्वहीन तृणमूल को फिर से महत्वपूर्ण बनाने के लिए पीछे से साजिश रची जा रही है। "

मोहम्मद सलीम

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल के सचिव

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
31 मई 202619 क्लिक
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दमदम में निर्दयता से बेदखली, हॉकरों को लेकर सीआईटीयू का संघर्ष

राज्य

दमदम में निर्दयता से बेदखली, हॉकरों को लेकर सीआईटीयू का संघर्ष

सिर्फ दमदम स्टेशन ही नहीं, बल्कि उत्तरपाड़ा स्टेशन से सटे इलाकों में भी बुलडोजर लाकर एक के बाद एक दुकानें ध्वस्त की जा रही हैं।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
31 मई 20268 क्लिक
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उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक हिंदी पत्रकारिता के दो सौ बरस - बादल सरोज

अतिथि लेखन

उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक हिंदी पत्रकारिता के दो सौ बरस - बादल सरोज

पत्रकारिता – विशेषकर हिंदी पत्रकारिता – लिजलिजाते हुए रेंगते, सत्ता में बैठे राजनेताओं के पांवों में लोटते प्राणियों के झुण्ड में बदल कर रह गयी है। पहरेदार - ‘वॉच डॉग’ – से गोदी मीडिया – लैप डॉग – में बदलकर रह गयी है। इसके लिए पत्रकारों को दोषी ठहराना रोग को गलत तरीके से पहचानना होगा। उनमें आज भी साहस और कौशल की कमी नहीं है – समस्या यह है कि उनकी अभिव्यक्ति पर ही सेंसरशिप लगा दी गयी है। जिन्हें कथित पत्रकारिता के पुरोधा बताकर प्रतिष्ठापित किया जा रहा है, वे और भले कुछ भी कहे जाएँ, पत्रकार कहीं से भी नहीं हैं।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
30 मई 202622 क्लिक
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राज्य

मेयर सहित चंदननगर कॉर्पोरेशन में तृणमूल-कांग्रेस के 30 पार्षदों का इस्तीफा

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
30 मई 20264 क्लिक
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हिंदुत्ववादी अर्थव्यवस्था में  हिंदुओं को क्या लाभ? :- शमीक लाहिड़ी

अतिथि लेखन

हिंदुत्ववादी अर्थव्यवस्था में हिंदुओं को क्या लाभ? :- शमीक लाहिड़ी

पिछले एक दशक में भारत में हिंदुत्ववादी राजनीतिक दर्शन के समानांतर जो विशेष आर्थिक मॉडल विकसित हुआ है, वह मूल रूप से 'राष्ट्रवादी भावनाओं और पूँजीपतियों के हितों की एक जुगलबंदी' है। एक तरफ राम मंदिर, उग्र राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पुनरुत्थान की भावनाओं में आम जनता को उलझाकर रखा जा रहा है; दूसरी तरफ पर्दे के पीछे देश की संपत्तियों और नीतियों को इस तरह संचालित किया जा रहा है जिससे केवल कुछ बेहद अमीर कॉर्पोरेट समूहों को ही फायदा हो। इसके प्रत्यक्ष शिकार देश के किसान, मजदूर, निम्नवर्ग और वेतनभोगी मध्यमवर्ग के लोग हो रहे हैं।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
29 मई 202631 क्लिक
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अनीक दत्त:-श्रद्धांजलि  (शिबम दास )

सिनेमा

अनीक दत्त:-श्रद्धांजलि (शिबम दास )

अनीक दा सिनेमा में लौटना चाहते थे! लेकिन आज वह शववाहन (एम्बुलेंस) में 'नंदन 'लौटे! जिस 'नंदन' ने उनकी फिल्म को बार-बार ठुकराया, उसी 'नंदन' में आज वह इस भारी कोलाहल के बीच शांत होकर सोए हुए लौटे! जो लोग आज भीड़ लगाकर खड़े हैं, क्या वे उस दिन इसी तरह उनके साथ आकर खड़े होकर नहीं कह सकते थे—"अनीक दा, आपकी फिल्म 'नंदन 'में चलेगी ही चलेगी! हम आपके साथ हैं!" पता नहीं, किसी ने ऐसा क्यों नहीं कहा! आज अब ये सब कहने से भी क्या होगा! जो चला गया, वह तो वापस नहीं आता! इंसान कभी लौटकर नहीं आता! समय के नियम के अनुसार सब कुछ धुंधला हो जाता है! लेकिन मैं दिल से मानता हूँ कि सब कुछ खो जाने के बाद भी, इन चापलूसों की भीड़ में अनीक दत्त का सिनेमा, उनकी सामाजिक चेतना और उनका प्रतिवाद हमेशा एक इतिहास बनकर ज़िंदा रहेगा!

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
29 मई 202634 क्लिक
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रोजगार चाहिए, रोजगार है कहां ?- अयनांशु सरकार

अतिथि लेखन

रोजगार चाहिए, रोजगार है कहां ?- अयनांशु सरकार

बढ़ती बेरोजगारी वास्तव में पूंजीवाद की देन है, इसके संकट का परिणाम है। रोजगार की समस्या केवल नौकरियों की कमी की समस्या नहीं है, बल्कि इसका शिक्षा क्षेत्र पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। रोजगार का भविष्य जितना खराब होगा, शिक्षा में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या उतनी ही कम होगी। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सीटें खाली पड़ी रहेंगी। बेरोजगारी के भीषण दर्द का फायदा उठाकर युवाओं को गुमराह करने की साजिश रची जा रही है। अति दक्षिणपंथी ताकतें दुनिया भर में बेरोजगारी और निराशा में डूबे युवाओं का इस्तेमाल कर रही हैं।

अक्षत(For Testing)अक्षत(For Testing)
29 मई 202631 क्लिक
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अनीक दत्त को अंतिम श्रद्धांजलि  देने के लिए आज एनटी-1 स्टूडियो में  रखा जाएगा पार्थिव शरीर

राज्य

अनीक दत्त को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए आज एनटी-1 स्टूडियो में रखा जाएगा पार्थिव शरीर

एनटी-1 स्टूडियो से ही उनकी अंतिम यात्रा शुरू होगी। 'पीस वर्ल्ड' से पहले शव को एनटी-1 स्टूडियो ले जाया जाएगा और वहाँ से केओड़ातल्ला श्मशान घाट ले जाया जाएगा। संदेश में परिवार की ओर से प्रशंसकों, दोस्तों और सहकर्मियों से अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील भी की गई है।

श्रेया जायसवालश्रेया जायसवाल
29 मई 202613 क्लिक
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हॉकर बेदखली के पीछे का सच

विश्लेषण

हॉकर बेदखली के पीछे का सच

भाजपा खुद को बाहरी तौर पर एक हिंदू-राष्ट्रवादी, सांप्रदायिक पार्टी के रूप में पेश करती है, लेकिन असल में, यह बड़े कॉर्पोरेट पूंजीपतियों के हितों की पूर्ति का एक राजनीतिक माध्यम है।

राजीव कुमार पाण्डेयराजीव कुमार पाण्डेय
28 मई 202661 क्लिक
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'अनीक के जाने से बंगाली मेधा का एक युग खत्म हो गया'- याद कर रहें हैं देबज्योति मिश्र

सिनेमा

'अनीक के जाने से बंगाली मेधा का एक युग खत्म हो गया'- याद कर रहें हैं देबज्योति मिश्र

पेश है देबज्योति मिश्र के शब्दों में उनके प्रिय मित्र की यादें: मशहूर बांग्ला फिल्म निर्देशक अनीक दत्त के निधन से न केवल सिनेमा जगत, बल्कि कला और बौद्धिक जगत को भी एक गहरा सदमा लगा है। उनके सबसे करीबी मित्रों में से एक संगीतकार देबज्योति मिश्र ने अपने प्रिय साथी को याद करते हुए एक बेहद भावुक संस्मरण साझा किया है। उन्होंने बताया कि अनीक सिर्फ एक फिल्मकार नहीं थे, बल्कि उनके भीतर पुराना कोलकाता साँस लेता था। मैंने शुरुआत से ही देखा था कि अनीक अपनी राजनीतिक विचारधारा को लेकर बेहद स्पष्ट और मजबूत थे। सत्ता में बैठी सरकार के खिलाफ खड़े होकर जो बातें अनीक ने खुलकर कहीं, वैसी हिम्मत इस शहर का कोई दूसरा कलाकार नहीं दिखा सका। मैंने उन्हें कभी भी अन्याय या किसी ताकत के सामने घुटने टेकते नहीं देखा।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
28 मई 202661 क्लिक
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हौसले और बेबाकी का दूसरा नाम - 'अनीक दत्त'- दीपान्विता मुखर्जी घोष

सिनेमा

हौसले और बेबाकी का दूसरा नाम - 'अनीक दत्त'- दीपान्विता मुखर्जी घोष

अनीक दत्त कहते थे, “इतना डरने से काम नहीं चलता। मैं उनके पुरस्कार या तिरस्कार , किसी की परवाह नहीं करता।”

'कोलकाता अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव' के दौरान 'नंदन' में बैठकर उन्होंने ममता बनर्जी का विरोध किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि 'नंदन 'जैसी सांस्कृतिक जगह पर चारों तरफ ममता बनर्जी की तस्वीरें क्यों टंगी होनी चाहिए? 'भबिश्यतेर भूत' के हर हिस्से में उन्होंने सरकारी भ्रष्टाचार की घटनाओं को उजागर किया था। इसका खामियाजा भी उन्हें भुगतना पड़ा। शूटिंग के दौरान उन्हें रोका गया। जरूरी अनुमतियां नहीं मिलती थीं। उनकी फिल्मों को सरकारी सिनेमाघर नहीं मिलते थे। रिलीज के शुरुआती दिनों में 'अपराजित' को नंदन में जगह नहीं मिली थी। जनता के भारी विरोध को देखकर कुछ दिनों बाद उसे वहाँ जगह दी गई।

उन्होंने कहा था, “क्या हम भिखारी हैं, जो लोगों से कहेंगे कि हमारी फिल्म के समर्थन में खड़े हों?”

सोलह साल के फिल्मी करियर में सिर्फ सात फिल्में। इतनी कम फिल्में क्यों?- “क्या मैं कोई कारखाना हूँ, जो लगातार फिल्में बनाता जाऊं? और फिल्म बनानी ही होगी, ऐसी कसम तो मुझे किसी ने नहीं दिलाई।” - यही निर्देशक अनीक दत्त थे। बिल्कुल अलग और स्वतंत्र।

केशव कुमार भट्टड़केशव कुमार भट्टड़
28 मई 202651 क्लिक
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