स्मार्ट मीटर रद्द करने की माँग को लेकर

उत्तर प्रदेश के जिलों में सीपीआई(एम) का विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश: बिजली के निजीकरण के खिलाफ और जबरन स्मार्ट मीटर लगाने के विरोध में एक महीने तक चले अभियान के बाद, सोमवार को सीपीआई(एम) ने उत्तर प्रदेश के हर जिले में बिजली विभाग के सामने धरना-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा। उत्तर प्रदेश में बिजली का संकट गहरा गया है। ऊपर से लोगों की शिकायत है कि स्मार्ट मीटर के कारण बिजली का बिल बहुत ज्यादा बढ़ गया है। वहीं, स्मार्ट मीटर की प्रीपेड व्यवस्था के चलते रातों-रात बिजली कनेक्शन कट जा रहा है। कुल मिलाकर स्थिति पहले से ही गंभीर थी, इसी बीच शनिवार को 10% फ्यूल और पावर परचेज सरचार्ज लगाने का निर्देश दे दिया गया। इसके चलते राज्य में बिजली के दाम और बढ़ने वाले हैं।

स्मार्ट मीटर रद्द करने की मांग को लेकर सोमवार को राज्य के हर जिले में सीपीआई(एम) और जनसंगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया। राजधानी लखनऊ के अलावा मेरठ, मुरादाबाद, सहारनपुर, कासगंज, बुलंदशहर, इटावा, बिजनौर, एटा, आगरा, बहराइच, सुल्तानपुर, अयोध्या, कानपुर, प्रतापगढ़, इलाहाबाद, वाराणसी, गाजीपुर, चंदौली, मऊ, देवरिया, गोंडा, बलिया, भदोही आदि जिलों में जुलूस निकाली गईं। इसके बाद जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि बिजली विभाग का निजीकरण तुरंत रोका जाए। बिजली जैसी बुनियादी सेवा को निजी हाथों में सौंपने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा, बिजली की कीमतें बढ़ेंगी और कर्मचारियों के अधिकार भी प्रतिकूल रूप से प्रभावित होंगे। सीपीआई(एम) की ओर से कहा गया कि "बिजली एक आवश्यक जनसेवा है, मुनाफा कमाने का जरिया नहीं। इसलिए सरकार को निजीकरण की नीति वापस लेकर सरकारी क्षेत्र को और मजबूत करना चाहिए, ताकि आम लोगों को किफायती दरों पर और बेहतर गुणवत्ता वाली बिजली सेवा मिल सके।"

स्मार्ट मीटर के खिलाफ उत्तर प्रदेश भर में 10 मई से सीपीआई(एम) लगातार अभियान चला रही है। जिलों में इसे लेकर विरोध सभाएँ और प्रदर्शन हुए हैं। सीपीआई(एम) की मांग है कि स्मार्ट मीटर परियोजना को पूरी तरह से रद्द किया जाए। पार्टी का कहना है कि सरकार जबरन लोगों के घरों में स्मार्ट मीटर लगा रही है। स्मार्ट मीटर में बहुत ज्यादा बिल आ रहा है। पार्टी का आरोप है कि तकनीकी खामियों के कारण ही भारी-भरकम बिल आ रहे हैं, जिसे ठीक कराने के लिए लोगों को दिन-रात दौड़-भाग करनी पड़ रही है।

चूंकि स्मार्ट मीटर प्रीपेड हैं, इसलिए पैसे खत्म होते ही बिजली कनेक्शन अपने आप कट जाता है। लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। पूरे राज्य में इसे लेकर लोगों का गुस्सा चरम पर है। इस स्थिति में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि प्रीपेड मीटर को पोस्टपेड कर दिया जाएगा। लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर स्मार्ट मीटर बदलने को तैयार नहीं है और न ही इस परियोजना को छोड़ना चाहती है।

इस पर विरोध सभाओं में सीपीआई(एम) साफ तौर पर कह रही है कि सरकार बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपना चाहती है। यही कारण है कि जनता के भारी आक्रोश के बावजूद सरकार स्मार्ट मीटर परियोजना को रद्द नहीं कर रही है। सीपीआई(एम) का कहना है कि अगर एक बार बिजली व्यवस्था का निजीकरण पूरा हो गया, तो आज आंदोलन करके जो कुछ हासिल किया जा पा रहा है, उसका कोई मौका नहीं बचेगा। निजी कंपनियां अपनी मनमर्जी करेंगी। इसलिए अभी आंदोलन करके सरकार को स्मार्ट मीटर व्यवस्था रद्द करने और बिजली के निजीकरण के प्रयास को वापस लेने के लिए मजबूर करना होगा।

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साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति | 2 जून 2026