बेदखली के विरोध में लाल झंडा मार्च और ज्ञापन
पुरुलिया में बुलडोज़र कार्रवाई के ख़िलाफ़ फूटा गुस्सा
पुरुलिया। पश्चिम बंगाल। 1 जून। बुलडोज़र चलाकर बेरोज़गार किए गए लोग सोमवार को चिलचिलाती कड़ी धूप की परवाह किए बिना पुरुलिया शहर की सड़कों पर उतर आए। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के आह्वान पर आयोजित इस रैली और ज्ञापन (डेप्युटेशन) कार्यक्रम में उनके परिवार के सदस्य भी शामिल हुए। कोई नहीं जानता कि कल उनके घर में चूल्हा कैसे जलेगा ? बच्चों की पढ़ाई का ख़र्च कहाँ से आएगा ? और बीमारी में इलाज कैसे होगा? यह भी उनकी समझ से बाहर है। हज़ारों लोग इस समय बेहद असहाय स्थिति का सामना कर रहे हैं।
पिछले कुछ दिनों में पुरुलिया शहर के ज़िला कोर्ट और सदर अस्पताल परिसर के आसपास बुलडोज़र चलाकर सैकड़ों दुकानदारों को उजाड़ दिया गया है। इन लोगों को मात्र कुछ घंटों का नोटिस देकर दुकानें ख़ाली करने को कहा गया था। आज भी लोग उस मलबे के बीच खड़े होकर रो रहे हैं और कह रहे हैं कि उनका सब कुछ लुट गया है। फिर-से बसाने (पुनर्वास) की कोई व्यवस्था किए बिना, 'डबल इंजन' की सरकार ने सत्ता में आने के एक महीने के भीतर ही सैकड़ों लोगों के मुँह का निवाला छीन लिया है। ऐसे समय में सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (CITU) और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) उनके साथ आकर खड़े हुए हैं।
रोज़गार छिनने से पैदा हुआ आक्रोश
एक दुकान का मतलब सिर्फ़ एक दुकान नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की आजीविका का साधन होता है। साथ ही, उस दुकान में काम करने वाले कर्मचारियों का पेट भी उसी से पलता है। ढेरों वादे करके सत्ता में आई इस सरकार ने लोगों के पेट पर लात मारी है। शहर भर में अतिक्रमण हटाने के नाम पर दहशत का माहौल बना दिया गया है। कई पीढ़ियों पुराने व्यापार को 'अवैध क़ब्ज़ा' बताकर इस सरकार के प्रशासन ने बुलडोज़र से ज़मींदोज़ कर दिया।
सोमवार को बेघर हुए दुकानदारों और उनके परिवारों ने कंधों पर लाल झंडा उठाया और पुरुलिया शहर में भगत सिंह की प्रतिमा के सामने से मार्च शुरू किया। पूरे शहर का चक्कर लगाने के बाद यह रैली पुरुलिया नगर पालिका पर जाकर समाप्त हुई। स्थिति यह थी कि उस दिन पुरुलिया नगर पालिका पूरी तरह घिर गई थी। सब कुछ खो चुके इन लोगों को अब समझ आ रहा है कि इस लाल झंडे के अलावा उनका साथ देने वाला कोई और नहीं है।
पुनर्वास की माँग और प्रशासन का आश्वासन
बेदख़ली से पहले पुनर्वास की माँग को लेकर पुरुलिया नगर पालिका के प्रशासक और उप-विभागीय शासक (सदर) को एक ज्ञापन सौंपा गया। इस कार्यक्रम में बिमलेंदु कोनार, कृष्णपद विश्वास, सुशांत महतो, सायंतन घोष और शमशेर अली सहित विस्थापित दुकानदारों के 5 प्रतिनिधि शामिल हुए।
नगर पालिका के बाहर सरकार की इस तानाशाही और बुलडोज़र नीति की तीखी आलोचना करते हुए सीपीआई (एम) के ज़िला सचिव प्रदीप रॉय, सीआईटीयू के ज़िला सचिव हाराधन बनर्जी के अलावा कृष्णपद विश्वास, निखिल मुखर्जी, बिनय रजक, सुप्रिया सेन और परिमल कुमार ने भाषण दिए। कई पीड़ित दुकानदारों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिमलेंदु कोनार ने की।
प्रशासन का पक्ष: अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) ने बताया कि पुनर्वास के लिए जगहों की छंटनी/चुनाव का काम चल रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि कुछ ही दिनों में पुनर्वास की व्यवस्था कर दी जाएगी।
लेकिन सवाल अब भी वही है कि तब तक इन लोगों के पेट में दाना कहाँ से जाएगा, यह कोई नहीं समझ पा रहा है। इस घटना को लेकर पूरे शहर में भारी आक्रोश है।
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गणशक्ति ऑन लाइन । 01 जून 2026
